यूपी निकाय चुनाव की मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई है। किसकी जीत होगी और किसकी हार इसका फैसला शुक्रवार को होगा। चुनाव परिणाम को लेकर सभी राजनीतिक दलों की धड़कने तेज हो गईं हैं। कोई भी राजनीतिक दल अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर नहीं आ रहे हैं। मतदान के बाद प्रत्याशियों की जीत हार की तस्वीरें साफ हो जाती थीं। इस बार कोई भी राजनीतिक दल दावें के साथ जीत के बारे में कुछ भी कहने से बच रहा है। मतदान के बाद भी अभी तक सब कुछ बिखरा-बिखरा नजर आ रहा है।
राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि लोकसभा चुनाव रहा हो या विधानसभा चुनाव सभी में मतदान के बाद तस्वीर काफी हद तक सामने आ जाती थी। बीजेपी जो लगातार चार बार से मेयर पद पर कब्जा जमाती चली आ रही है वहां भी इस बार जीत को लेकर पार्टी के नेता पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं।
दरअसल इसके पीछे तीनों प्रमुख दलों में भितरघात, मुस्लिम मतों का विभाजन माना जा रहा है। जिस तरह से शुरूआती दौर में लड़ाई बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच दिख रही थी वहीं मतदान के नजदीक पहुंचते पहुंचते सपा ने भी लड़ाई में अच्छी खासी घुसपैठ कर ली।
ऐसे में शुरूआत में जहां यह माना जा रहा था कि मुस्लिम मतों का कांग्रेस के पक्ष में ध्रुवीकरकण होगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यह माना जाता रहा है कि मुस्लिम मतों में बंटवारे का लाभ भाजपा को मिलता है लेकिन इस बार वह समीकरण भी सहीं नहीं बैठा।
पार्टी के नेता जो यह कहते रहे कि मेयर तो भाजपा का ही होगा उनकी भी बोलती बंद है। कांग्रेस में भी निराशा है तो लड़ाई को त्रिकोणात्मक बनाने वाली समाजवादी पार्टी के नेता भी असमंजस में हैं। सभी का कहना है कि एक दिसंबर को परिणाम आने के बाद ही खुलासा होगा।