अशोक तिवारी लंबे समय से भाजपा से जुड़े हैं। क्षेत्रीय टीम में दो बार मंत्री का दायित्व निभा चुके हैं। वर्ष 2014 से पहले से ही अशोक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के आयोजन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्हें शहर दक्षिणी सीट पर मजबूत दावेदार माना गया था, मगर उस समय के समीकरणों के चलते पार्टी ने विधायक नीलकंठ तिवारी को दोबारा मौका दिया था।
इसके बाद से ही अशोक तिवारी की नई भूमिका को लेकर पार्टी में कयास लगाए जा रहे थे। सपा ने राजपूत और कांग्रेस ने कायस्थ प्रत्याशी पर दांव लगाया है। अब भाजपा ने ब्राह्मण चेहरे को टिकट देकर शहरी मतदाताओं को रिझाने की पूरी कोशिश की है।