प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हंसराज विश्वकर्मा
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टिकट वितरण के दौरान बगावत की बात आई तो हंसराज ने संगठनात्मक सूझबूझ का परिचय दिया और स्थिति को सामान्य बनाने में अहम भूमिका निभाई। इससे हंसराज का कद बढ़ गया। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है, इसलिए संगठन व पदाधिकारियों के कामकाज का सटीक आकलन भी होता है।
बताया जा रहा है कि आपसी समन्वय व सूझबूझ से संगठन को मजबूत बनाने का इनाम हंसराज को मिला है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यक्रमों में भी उनकी सक्रिय सहभागिता रहती थी। हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाऊंगा। आकांक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में पिछड़ों का भला हुआ है।
- 1990 : काशी विद्यापीठ ब्लॉक के युवक मंगल दल के अध्यक्ष
- 1993: काशी विद्यापीठ मंडल के युवा मोर्चा में अध्यक्ष
- 1996 : मंडल मंत्री
- 2000: जिला कार्यसमिति के सदस्य
- 2002: पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पार्टी राक्रांपा से विधानसभा चुनाव लड़ा
- 2004: समाज कल्याण प्रकोष्ठ मेंं प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य
- 2008: पत्नी को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया
- 2010: किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष
- 2013: जिला मंत्री
- 2015: जिला सदस्यता प्रभारी
- 2016: लगातार दो बार से जिलाध्यक्ष
- 2017: पांच विधानसभा क्षेत्रों की जीत में अहम भूमिका
- 2019: वाराणसी से जुड़े तीन लोकसभा क्षेत्रों में काम किया-
- 2021: जिला पंचायत अध्यक्ष व आठ ब्लॉक प्रमुखों की जीत में अहम भूमिका
- 2022: विधानसभा चुनाव में संगठन को मजबूत बनाकर आगे बढ़े।