भदोही लोकसभा सीट से टीएमसी के प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी ने खास बातचीत में कहा कि काशी और प्रयागराज का विकास हुआ, भदोही को लेकर सदन में आवाज उठेगी तो यहां का भी विकास होगा।
भदोही लोकसभा क्षेत्र से इंडी गठबंधन ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नेता ललितेश पति त्रिपाठी पर दांव लगाया है। ललितेश पति का कहना है कि काशी और प्रयागराज का विकास हुआ, लेकिन भदोही पिछड़ा ही रह गया। भदोही को लेकर सदन में लगातार आवाज उठेगी तो यहां का भी विकास होगा।
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कांग्रेस से दूरी बनाकर फिर सपा-कांग्रेस के सहारे ही चुनाव लड़ रहे ललितेश पति ने गांधी परिवार से निजी रिश्तों, परिवारवाद और चुनाव के मुद्दे पर अमर उजाला के पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी से बात की...।
कांग्रेस से आप दूर हुए। फिर, सपा और कांग्रेस के समर्थन से एक ऐसी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं जिसके सिंबल के बारे में पूर्वांचल क्या उत्तर प्रदेश में भी बहुत ही कम लोग जानते हैं?
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यह बात बिल्कुल सही है। हमने जब चुनाव लड़ने का निर्णय किया था तो हमारे साथियों ने कहा था कि सपा या कांग्रेस का सिंबल ले लें।
मगर, सपा-कांग्रेस के साथियों की मेहनत से और इंडी गठबंधन के प्रति आमजन के उत्साह के चलते आज भदोही का जन-जन हमारे सिंबल को जान-पहचान रहा है।
आपके पिता पूर्व एमएलसी ने हाल ही में काशी में कहा था कि कांग्रेस छोड़ना एक भूल थी। क्या यह माना जाए कि ललितेश पति चुनाव बाद कांग्रेस में वापस दिखेंगे?
राजेश पति जी बड़े नेता हैं। उनकी जो बात है, आप उनसे पूछिए। आज भदोही से मैं, इंडी गठबंधन से चुनाव लड़ रहा हूं तो सिर्फ ममता बनर्जी जी के कारण...। ममता जी को स्व. मुलायम सिंह यादव जी छोटी बहन मानते थे। ममता जी ने अखिलेश जी से एक सीट मांगी तो उन्होंने उनका सम्मान करते हुए इस इलाके की अपनी सबसे मजबूत भदोही सीट हमें दे दी।
पंडित कमला पति त्रिपाठी के घराने से गांधी परिवार की नजदीकियां जगजाहिर रही हैं। आप और आपके पिताजी ने कांग्रेस छोड़ी तो क्या उसका असर निजी रिश्तों पर भी पड़ा?
स्वाभाविक है। देखिए, जब इतना पुराना रिश्ता चला आता है और फिर आप छोड़ते हैं तो कुछ न कुछ नाराजगी तो रहती है। हालांकि हमारे परिवार एक रहे हैं, इसलिए हमें नहीं लगता है कि बहुत असर पड़ा होगा। वह जानते हैं कि उनके कारण हमने कांग्रेस नहीं छोड़ी है। कांग्रेस छोड़ने के बाद हम कहीं भी जा सकते थे। मगर, हमने कांग्रेस जैसी विचारधारा वाली पार्टी ही चुनी। कांग्रेस की जो विचारधारा है, वह हमारे रग-रग में है। हम उससे नहीं अलग हो सकते हैं।
भाजपा परिवारवाद को लेकर हमेशा हमलावर रहती है। क्या यह माना जाए कि पंडित कमला पति त्रिपाठी का प्रपौत्र होने के कारण आपको इंडी गठबंधन ने प्रत्याशी चुना?
प्रधानमंत्री जी भदोही आए तो परिवारवाद पर उन्होंने कुछ नहीं कहा। हम तीन-चार चुनाव लड़ चुके हैं। हार भी हुई और जीत भी हुई। मगर, आज ललितेश पति को व्यक्तिगत रूप से उतने ही लोग जानते हैं, जितने लोग पंडित कमला पति त्रिपाठी के प्रपौत्र के रूप में जानते हैं। हमने अपनी पहचान खुद बनाई है। परिवार वाला टैग है, मैं उसे नकार नहीं रहा हूं। पंडित कमला पति ने पूर्वांचल ही नहीं प्रदेश और देश में विकास कार्य किए थे। ऐसे में स्वाभाविक है कि कहीं भी जाऊंगा तो उनका नाम तो साथ ही चलेगा और उसमें भला गलत क्या है।
बनारस-चंदौली आपके परिवार का सियासी गढ़ रहा। मिर्जापुर से आप विधायक रहे। फिर, भदोही क्यों चुना?
हमें तो विश्वास ही नहीं हुआ था कि अखिलेश जी हमें अपनी सबसे अच्छी सीट दे रहे हैं। हमारे वरिष्ठों ने हमारे भविष्य के लिए क्या सोच रखा है, यह हम उन्हीं से पूछ कर बता पाएंगे। फिलहाल यही ही है कि उनके विश्वास पर खरा उतरूं, इसके लिए प्रयासरत हूं।
मिर्जापुर-भदोही से आपके पिता चुनाव हार चुके हैं। क्या यह माना जाए कि इस बार आप अपने पिता की हार का बदला लेंगे?
देखिए, राजनीति में बदले जैसी बात नहीं होती है। वह वर्ष 2004 का चुनाव था, उस समय हमारे पास समय बहुत कम था। इसके बावजूद हम लोग सशक्त तरीके से उपस्थिति दर्ज कराए थे। इस बार गठबंधन है और बड़े-बड़े संगठन जुड़े हैं। ऊर्जावान कार्यकर्ता जीत के लिए लड़ रहे हैं।