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UP: नाम अवधेश और कृष्णानंद राय का... निशाना आठ लाख भूमिहार वोटों पर; यहां राय बिरादरी बिगाड़ती है सियासी खेल

Tue, 28 May 2024 01:14 PM IST
शाहरुख खान पुष्पेन्द्र कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी

सार

यहां अवधेश राय और कृष्णानंद राय के नाम पर आठ लाख भूमिहार वोटों पर निशाना है। यूपी की इन सीटों पर राय बिरादरी के वोटर सियासी खेल बनाते-बिगाड़ते हैं। 
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Up Lok Sabha Election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की हत्या के मामले में सजायाफ्ता माफिया मुख्तार अंसारी की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पहली बार सार्वजनिक मंच से बयान दिया। कपसेठी क्षेत्र के लखनसेनपुर गांव स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के मैदान में मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा अवधेश राय को श्रद्धांजलि दे रही है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि अवधेश राय की हत्या माफिया ने की थी। मगर, उनके भाई और कांग्रेस प्रत्याशी ने माफिया के सामने घुटने टेकने का काम किया था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने लखनसेनपुर और गाजीपुर में भाजपा के पूर्व विधायक कृष्णानंद राय को श्रद्धांजलि दी। 

सियासी जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अवधेश राय और कृष्णानंद राय के नाम के बहाने पूर्वांचल के सातवें चरण के पांच लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आठ लाख से ज्यादा भूमिहार मतदाताओं को साधने का काम किया है। कारण कि, भूमिहार बिरादरी के दोनों ही चर्चित चेहरों की हत्या के पीछे माफिया मुख्तार अंसारी का नाम ही हमेशा सामने रहा है।
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काशी से रघुनाथ सिंह, सत्यनारायण सिंह और लोकबंधु राजनारायण जैसे भूमिहार नेताओं का नाता रहा है। यह जरूर है कि राम जन्मभूमि आंदोलन के बाद वाराणसी से भूमिहार बिरादरी का कोई नेता संसद नहीं पहुंच सका। 90 के दशक के बाद काशी से सटे लहुरी काशी कहलाने वाले गाजीपुर से भूमिहार बिरादरी के मनोज सिन्हा तीन बार संसद पहुंचे।

मऊ जिले की घोसी लोकसभा से वर्ष 1989 से कल्पनाथ राय को लगातार चार बार संसद पहुंचने का अवसर मिला। उनके बाद वर्ष 2019 के आम चुनाव में भूमिहार बिरादरी के अतुल राय ने घोसी से दिल्ली तक का रास्ता तय किया।

इसके अलावा बलिया लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भूमिहार बिरादरी के प्रत्याशी संसद तक तो नहीं पहुंचे, लेकिन वह चुनाव का गणित बनाने और बिगाड़ने की भूमिका में रहते हैं। इसी तरह से चंदौली में भूमिहार बिरादरी निर्णायक भूमिका में तो नहीं है, लेकिन इतनी संख्या जरूर है कि वह किसी भी प्रत्याशी को सियासी संजीवनी दे सकते हैं।

पांच सीटों पर भूमिहार बिरादरी के मतदाताओं का गुणा-गणित
जातिगत मतगणना न होने की वजह से किसी भी जाति के मतदाताओं की निश्चित संख्या बता पाना संभव नहीं है। मगर, मतदाताओं की जाति आधारित संख्या को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के अपने-अपने दावे हैं। अलग-अलग दावों के निचोड़ के अनुसार पूर्वांचल में बलिया में तकरीबन तीन लाख भूमिहार मतदाता हैं।

 
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मऊ जिले की घोसी लोकसभा में भूमिहार मतदाताओं की संख्या डेढ़ लाख बताई जाती है। वाराणसी में डेढ़ लाख तो गाजीपुर में एक लाख से ज्यादा भूमिहार बिरादरी के मतदाताओं के होने का दावा किया जाता है। वहीं, चंदौली लोकसभा क्षेत्र में भूमिहार बिरादरों के मतदाताओं की संख्या 50 से 60 हजार होने की बात राजनीतिक दलों के द्वारा कही जाती है।
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