पश्चिमी यूपी में कई जिलों में डिप्थीरिया (गलाघोटू) से ग्रसित मरीजों की मौत के बाद स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची है। स्वास्थ्य महानिदेशालय से प्रदेश के सभी जिलों में गठित रैपिड रिस्पांस टीम को अलर्ट करते हुए अभियान चलाकर ऐसे मरीजों का टीके लगाने, जांच कराने और दवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश के कई जिलों में चलाए गए अभियान में 206 लोगों में इसके लक्षण मिले थे। जांच कराई गई तो 62 की रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के निदेशक डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी ने सीएमओ को भेजे पत्र में बताया है कि अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके बाद प्रदेश भर में अलर्ट जारी करते हुए अभियान चलाकर ऐसे लोगों को चिह्नित कर इलाज कराने का निर्देश दिया। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. बीएस राय ने बताया कि डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है जो जीवाणु कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरी के कारण होती है, जो गले और उसके ऊपरी हिस्से को संक्रमित करती है। शुरुआत में इसे कम बुखार और गले में सूजन द्वारा चिह्नित किया जाता है। यदि इसका समय से इलाज न किया गया तो बच्चे की मौत भी हो सकती है।
ऐसे करें बचाव
टीकाकरण से बच्चे को डिप्थीरिया बीमारी से बचाया जा सकता है। नियमित टीकाकरण में पेंटावेलेंट्स के संयुक्त टीके में डीपीटी के लगाये जाते हैं। बच्चे को छठवें, 10वें और 14वें सप्ताह में टीकाकरण किया जाता है और 16 से 24 माह पर डीपीटी का पहला बूस्टर और 5 साल में दूसरा बूस्टर लगाया जाता है। इसके अलावा गंभीर परिस्थिति में बच्चे को एंटी-टोक्सिन भी दिया जाता है, इससे टीकाकरण के बाद डिप्थीरिया की सम्भावना कम रहती है।
क्या है डिप्थीरिया
इस बीमारी के होने पर गला सूखने लगता है, आवाज फटने लगती है, गले में जाल पडऩे के बाद सांस लेने में दिक्कत होती है। इलाज न कराने पर शरीर के अन्य अंगों में संक्रमण फैल जाता है। यदि इसके जीवाणु हृदय तक पहुंच जाएं तो जान भी जा सकती है। डिफ्थीरिया से संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने पर अन्य बच्चों को भी इस बीमारी के होने का खतरा रहता है।
यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। पीडि़त के गले में दर्द, तेज बुखार और मुंह में सफेद झिल्ली बन जाती है। गले में सूजन से सांस नली दब जाती है। दिल पर भी असर होता है। सही समय पर इलाज नहीं मिलने से बच्चे-किशोर की मौत भी हो जाती है।