उदय प्रताप शिक्षा समिति पर नियम विरुद्ध कार्य करने के लगाए गए आरोपों की जांच शुरू हो गई। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा गठित दो सदस्यीय समिति सोमवार को जांच करने यूपी कालेज पहुंची। समिति ने शिकायतकर्ता डॉ. वशिष्ठ सिंह व प्राचीन छात्र एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद विजय के बयान दर्ज किए।
सोमवार को शिकायतकर्ता डॉ. वशिष्ठ सिंह व आनंद विजय सिंह ने जांच समिति से कहा कि 2012 से 18 तक प्रबंध समिति ने काफी मनमानी की है। इस दौरान जितने भी काम और लेनदेन हुए हैं, उन सभी की जांच कराई जाए। उन्होंने जांच समिति को इस दौरान हुए तमाम दस्तावेज भी सौंपे। मंगलवार को लखनऊ से एक टीम और आएगी। शिकायतकर्ताओं ने प्रबंध समिति पर मनमाने तरीके से कार्य करने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे शिकायती पत्र में उदय प्रताप शिक्षा समिति की वैधता पर ही सवाल उठाया है। इसमें कहा गया है कि भिनगा नरेश राजर्षि उदय प्रताप सिंह ने वर्ष 1908 में हिवेट क्षत्रिय इंडाउमेंट ट्रस्ट बनाकर उदय प्रताप कालेज की स्थापना की थी। बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने धर्मादा संस्थान के कोषाध्यक्ष को संचालित करने का अधिकार दे दिया। वहीं एक स्कीम के तहत प्रबंध समिति का गठन कर लिया गया। वैधानिक तरीके से शिक्षा समिति का गठन नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच कराने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से जारी आदेश में समिति में उच्च शिक्षा विभाग के वित्त विभाग से संबंधित एक प्रतिनिधि व काशी विद्यापीठ के एक प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री कार्यालय समिति ने 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है।
छात्रों ने लगाई सुरक्षा की गुहार
वाराणसी। यूपी कॉलेज में धरना दे रहे छात्रों ने एसएसपी को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की है। छात्रों का कहना है कि धरनास्थल पर अराजक तत्व रात्रि में शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने एससपी से निवेदन किया है कि धरनास्थल पर छात्रों की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं।