कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए प्रदेश में यूपी 100 सेवा शुरू हुई तो लोगों को उम्मीद जगी कि वारदातों पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वारदातों में कमी जरूर आई है लेकिन अभी भी कुछ खामियां हैं, जिसकी आए दिन क्षेत्र से शिकायतें आती रहती हैं।
यूपी 100 पुलिस पर अवैध वसूली व सूचना के बाद भी देरी से पहुंचने के मामले भी सामने आए हैं। बावजूद लोगों में उम्मीद कुछ हद तक बढ़ी है। उप्र में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के मद्देनजर पिछली सरकार ने 30 दिसंबर 2016 को पूरे प्रदेश में यूपी 100 सेवा लॉन्च किया था।
इसके तहत बलिया जिले को कुल 38 वाहन प्राप्त हुआ था। इसमें सात इनोवा तथा 31 बोलेरो थी। इन वाहनों पर एक कमांडर, एक सब कमांडर व पायलट की तैनाती की गई थी। इसके अलावा वाहनों को संचालित करने के लिए जिले में कुल 912 प्वाइंट स्थापित किए गए थे।
इसमें प्रत्येक वाहनों के लिए 24 प्वाइंट स्थापित किए गए है। जो 15 से 20 किमी की दूरी तय करता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्र में यूपी 100 लगभग 30 से 35 मिनट और नगर क्षेत्र में 15 से 20 मिनट में मौके पर पहुंचेगी। लेकिन यूपी 100 के कुछ वाहन तो सूचना के घंटों बाद भी नहीं पहुंच पाते है।
जबकि कुछ वाहन करीब एक से डेढ़ घंटे बाद पहुंच पाते है। इस कारण पीड़ित मजबूर और लाचार हो जाता है और बदमाश घटना को अंजाम देकर फरार हो जाता है। यूपी 100 के खिलाफ सबसे अधिक शिकायतें देर से पहुंचने की आती हैं। इसकी वजह पुलिस चाहे जो बताए लेकिन कहीं न कहीं उदासीनता को दर्शाता है।
मामले में बलिया के यूपी 100 सेवा के जिलाप्रभारी रमाशंकर यादव ने कहा कि अवैध वसूली और सूचना के बाद भी देर से पहुंचने का आरोप बेबुनियाद है। पूरा प्रयास होता है कि सूचना के बाद जितनी जल्दी हो सके, वारदात स्थल पर पहुंचा जाए।