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बजट का दवाओं पर असर: कैंसर और मधुमेह के एक लाख मरीजों को मिलेगा फायदा, 17 दवाओं से बेसिक कस्टम डयूटी हटा

Mon, 02 Feb 2026 11:32 AM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: विदेशों से मंगाई जाने वाली गंभीर बीमारियों की दवाओं पर बजट का सीधा असर पड़ेगा। ऐसे में कैंसर और मधुमेह के एक लाख मरीजों को फायदा मिलेगा।
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दवा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कैंसर, मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी में प्रयोग की जाने वाली 17 दवाओं से बेसिक कस्टम डयूटी हटाने के फैसले से मरीजों को बड़ी राहत होगी। दवाएं सस्ती हो जाएंगी। इसका फायदा करीब एक लाख मरीजों को मिलेगा। इनमें 50 हजार कैंसर पीड़ित और इतने ही मधुमेह की चपेट में आते हैं। यह संख्या वो है जिनमें जांच के बाद पुष्टि होती है। ओपीडी में आने वाले मधुमेह पीड़ितों की संख्या ज्यादा होती है।

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कैंसर और मधुमेह की कुछ दवाइयां विदेश से आती हैं। उन पर कस्टम डयूटी लगने से उसका दाम बढ़ जाता है। अब इस फैसले का सीधा असर गंभीर बीमारियों की दवाओं पर होगा। जिले में आईएमएस बीएचयू, होमी भाभा कैंसर अस्पताल, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय कैंसर संस्थान के साथ तीन निजी अस्पतालों में कैंसर से ग्रसित मरीज आते हैं। औसतन हर साल करीब 50 हजार ऐसे मरीज होते हैं जिनको उपचार के दौरान डॉक्टर दवा लिखते हैं। इसमें कुछ दवाइयां तो सस्ती होती हैं लेकिन कुछ दवाइयां बहुत महंगी होती हैं। 

आईएमएस बीएचयू के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि कैंसर से ग्रसित मरीजों का चिकित्सा संस्थानों और निजी अस्पतालों में इलाज होता है। कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं जो विदेश से आती हैं। इन पर कस्टम डयूटी अपेक्षाकृत अधिक होने की वजह से उसका दाम बढ़ जाता है। बजट में कस्टम डयूटी हटने की वजह से मरीजों को दवाइयां भी सस्ती मिलेंगी।

इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के प्रो. एनके अग्रवाल के अनुसार साल दर साल मधुमेह के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। करीब 50 हजार से अधिक मरीज हर साल बीएचयू सहित अन्य अस्पतालों को मिलाकर इलाज कराने आते हैं। इन मरीजों को भी दवाओं के खरीदने में राहत होगी।
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जिला अस्पतालों में इमरजेंसी, ट्रॉमा केयर सुविधाएं बढ़ने से बीएचयू पर कम होगा दबाव

बजट में जिला अस्प्तालों में इमरजेंसी, ट्रॉमा केयर सुविधाएं बढ़ाने के फैसले से बीएचयू पर दबाव कम होगा। स्थानीय स्तर पर दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर हैं लेकिन यहां मानक के अनुसार कोई सुविधाएं नहीं होने की वजह से अधिकांश मरीजों को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर रेफर किया जाता है। अब बजट में इसका प्रावधान होने से ट्रॉमा केयर सुविधा भी बढ़ेगी। इसके अलावा पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाने की घोषणा से स्वास्थ्य कर्मियों को इलाज,जांच की ट्रेनिंग के साथ ही चिकित्सा संस्थानों में रिसर्च को भी बढ़ावा मिलेगा। मानसिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए नये संस्थानों के खोले जाने से मनोरोगियों को भी बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

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बजट विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने वाला साबित होगा। कैंसर की दवाओं के सस्ता होने के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना का लाभ भी मरीजों को मिलेगा। जिला अस्पताल में इमरजेंसी, ट्रॉमा केयर सुविधाओं में बढ़ोतरी का फैसला जीवनरक्षक सिद्ध होगा। -डॉ. अनुराग टंडन, अध्यक्ष, आईएमए
 
स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस साल जो बजट का प्रावधान किया गया है, वह पिछले साल के बजट से 10 फीसदी अधिक है। कैंसर, मधुमेह से जुड़ी दवाइयों से टैक्स घटाने से दवाइयां सस्ती होंगी। अगर निजी चिकित्सकों के लिए टैक्स में कोई विशेष छूट, मेडिकल उपकरणों के खरीद पर रियायत मिलती तो और राहत होती। -डॉ. संजय राय, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए
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