वाराणसी। ‘अच्छे दिन’ के दावे के बीच कैंट रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को रोजाना खराब अनुभवों से गुजरना पड़ रहा है। उच्चाधिकारी यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की बात करते हैं जबकि हालात ऐसे हैं कि भीषण गर्मी में यात्रियों को पीने का पानी तक मयस्सर नहीं हो पा रहा है।
बुधवार को फिर हजारों यात्री पानी के लिए तरस गए। आउटर पर ट्रेनों को घंटों खड़ा किए जाने से माहौल और गरमाया। फिर हल्ला-हंगामा जो शुरू हुआ, वह आउटर से प्लेटफार्म तक चला। आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें बिना पानी के ही रवाना हुईं। तमाम यात्री अपना झोला-बैग लिए आउटर से पैदल ही स्टेशन तक पहुंचे।
तीन घंटे से अधिक आउटर पर खड़ी रही ट्रेेन ः कैंट पर व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। बुधवार को साबरमती एक्सप्रेस तीन घंटे से ज्यादा समय तक आउटर पर खड़ी रही। शिवपुर से जब यह ट्रेन कैंट के लिए निकली तो उसे बीच में ही रोक दिया गया। उसके बाद कैंट के आउटर पर भीषण गर्मी में यात्री पस्त हो गए।
तीन घंटे तक यहां ट्रेन का एसी भी बंद कर दिया गया था। कई बोगियों में पानी खत्म हो गया था। बेहाल यात्रियों ने नारेबाजी शुरू कर दी। तमाम यात्री पैदल ही स्टेशन पहुंच गए। स्टेशन मैनेजर का घेराव करने उनके कार्यालय गए लेकिन उनके मौजूद न होने पर लौट आए। इसी तरह गोरखपुर-मुंबई, कोटा-पटना सहित कई ट्रेनों को बहुत देर बाद प्लेटफार्म नसीब हुआ।
टंकियां खाली, बिना पानी के रवाना हुईं ट्रेनें ः कहने को विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित की जा रही हैं लेकिन पेयजल जैसी सामान्य सुविधा के लिए यात्रियों को तरसना पड़ रहा है। आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें बिना पानी के रवाना हुईं। यात्रियों के हल्ला-हंगामे के बीच ट्रेनों के टीटीई भी पानी भरने वाले अटेंडेंटों से फरियाद करते दिखे लेकिन कोई असर नहीं हुआ। अटेंडेंटों का कहना था कि टंकी में पानी ही नहीं है।
वह चाहकर भी ट्रेनों में पानी नहीं भर सकते। टंकियों में जो थोड़ी-बहुत पानी था, उससे प्लेटफार्मों पर पीने के लिए और वाशिंग लाइन में सप्लाई दी जा रही थी। कोटा-पटना, दादर, सारनाथ एक्सप्रेस सहित आधा दर्जन से अधिक ट्रेनों में यहां पानी नहीं भरा जा सका।
खड़े होने तक की जगह नहीं, हुई धक्कामुक्कीः लंबी दूरी की ट्रेनों में जबरदस्त भीड़ होने के चलते तमाम यात्रियों को खड़े होने तक जगह नहीं मिली। मुंबई, दिल्ली की ट्रेनों में तो चढ़ने के लिए यात्री धक्का-मुक्की करते नजर आए। ब्रेकयान में भी यात्री भरे थे। भीषण उमस के बीच द्वितीय श्रेणी बोगियों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। दादर, महानगरी, कामायनी एक्सप्रेस में तमाम यात्री टिकट होने के बाद बोगियों में नहीं घुस पाए।