बेजोड़ थिरकन से देश-दुनिया को मुरीद बनाने वाली मशहूर नृत्यांगना उमराव जान को सोमवार की दोपहर काशी में याद किया गया। मौका था उनकी 79वीं बरसी का। दरगाह-ए-फातमान में उनकी कब्रगाह पर पुष्पवर्षा की गई। शमा रोशन कर उनके नृत्य का बखान किया गया।
इस मौके पर उनका मकबरा बनाने और उनके नाम पर संगीत एकेडमी खोलने की आवाज उठाई गई। उमराव जान ने अपना अंतिम समय बनारस में ही गुजारा था। 26 दिसंबर, 1937 में इसी शहर में अंतिम सांस ली थी।
नृत्यांगना उमराव जान की कब्र पर दोपहर करीब दो बजे दरगाह-ए-फातमान में चाहने वालों ने फूल चढ़ाए। डर्बीशायर क्लब के अध्यक्ष शकील अहमद जादूगर ने बताया कि उनके सधे अंदाज और भावों, इशारों का कोई जोड़ नहीं था।
अपनी अदाकारी से उन्होंने उस दौर के नवाबों, रजवाड़ों से लेकर आम जनमानस तक पर गहरी छाप छोड़ी थी। उमराव जान पर बनी दो फिल्मों पर भी उन्होंने रोशनी डाली।
इस मौके पर हैदर मौलाई, प्रमोद वर्मा, चिंतित बनारसी, आफाक हैदर, जौहर सेठ, डॉ. ए मोगिस, अफसर अली, साजिद जान मोहम्मद, विक्की यादव, मंजर आलम, नजमूल हसन समेत तमाम लोग शामिल थे।