यह फिल्म हमारे संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का भी खुला उल्लंघन करती है। यह फिल्म सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश का भी उल्लंघन करती है जिसमें कोर्ट ने कहा है कि विचाराधीन मामलों में सार्वजनिक भावनाओं को भड़काने वाले प्रचार से बचा जाए।
शुक्रवार फिल्म की रिलीज के दिन जुमा की नमाज और सावन का पवित्र महीना दोनों एक साथ है, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित होने और सांप्रदायिक तनाव फैलने का गहरा अंदेशा है। सचिव ने कहा कि हमारी मांग है कि फिल्म के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाई जाए।
निर्माता-निर्देशकों एवं प्रदर्शकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। जिला प्रशासन द्वारा शहर में विशेष सतर्कता और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अग्रिम कदम उठाए जाएं। स्थानीय सिनेमा घरों में इस फिल्म के प्रदर्शन से रोका जाए ताकि शांति बनी रहे।