उसे किसने और कहां जन्म दिया था, यह किसी को नहीं पता है। वह कैसे काशी आया यह भी कोई नहीं जानता, लेकिन अब उसकी परवरिश सात समंदर पार लंदन में एक अच्छे माहौल में होगी। जी हां, काशी अनाथालय में रह रहे दो वर्षीय नन्हे कान्हा को अब लंदन निवासी दंपती गोद लेकर उसका पालन-पोषण करेंगे। कान्हा को लेकर काशी अनाथालय प्रबंधन से जुड़े लोग भी खासे गदगद हैं कि उनके यहां के किसी अनाथ बच्चे को पहली बार विदेशी दंपती गोद ले रहे हैं।
लहुराबीर स्थित काशी अनाथालय में मौजूदा समय में 20 बच्चे रहते हैं। काशी अनाथालय के अधिशासी अधिकारी अरुण कुमार सिंह ने बृहस्पतिवार को बताया कि जनवरी 2019 की कड़कड़ाती ठंड में नवजात कान्हा (काल्पनिक नाम) बीएचयू परिसर में कहीं मिला था। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के निर्देश पर कान्हा को काशी अनाथालय एसोसिएशन को सौंपा गया।
जब यह स्पष्ट हो गया कि बच्चे का कोई वारिस कोई नहीं है तो विधिक प्रक्रियाओं को पूरा कर उसका विवरण सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी की वेबसाइट में अपलोड किया गया। इसी से जुड़ी हुई विदेशी दंपतियों की वेबसाइट भी है, जिससे वह भारतीय बच्चों को गोद ले सकते हैं।
विदेशी दंपती अपना पूरा विवरण केंद्रीय दतक ग्रहण प्राधिकरण को भेजते हैं। गोद लेने वाले बच्चे को जब वह चयनित कर लेते हैं तो उसके हावभाव और व्यवहार आदि के बारे में उन्हें बताया जाता है। इसके बाद अदालत की प्रक्रिया पूरी की जाती है। अदालत जब पूरी तरह संतुष्ट हो जाती है कि विदेशी दंपती बच्चे को अच्छे से रखेंगे तो वह कानूनी रूप से उन्हें सौंप दिया जाता है।
फरवरी से पहले बन जाएगा जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट
अरुण कुमार सिंह ने बताया कि नन्हे कान्हा को गोद लेने के लिए अदालत ने इजाजत दे दी है। अब उसका जन्म प्रमाण पत्र और पासपोर्ट बनना है। सब कुछ सही रहा तो फरवरी की शुरुआत में कान्हा लंदन चला जाएगा। अरुण कुमार सिंह ने कहा कि हमारी यही अपील है कि कान्हा की तरह अन्य बच्चों को भी लोग अपनाएं और उनकी अच्छे से परवरिश कर उनका भविष्य सवारें।
2019 से शुरू हुई गोद लेने की प्रक्रिया, अब तक 12 बच्चे गए
काशी अनाथालय में रहने वाले बच्चों को वर्ष 2019 से गोद लेने की प्रक्रिया शुरू हुई है। अनाथालय के अधिशाषी अधिकारी के अनुसार अब तक 12 बच्चों को उत्तराखंड, असम, दिल्ली, नोएडा, कोलकाता सहित देश के अन्य हिस्सों में रहने वाले दंपती गोद ले चुके हैं। कान्हा 13वां बच्चा है, जिसे विदेशी दंपती गोद ले रहे हैं।
साल भर तक की जाती है निगरानी, सोशल ऑडिटर जाते हैं घर
अनाथालय के अधिशासी अधिकारी के अनुसार जिन बच्चों को लोग गोद लेते हैं उनसे संस्था के प्रतिनिधि साल भर तक ऑडियो-वीडियो कॉल से संपर्क में रहकर उनका हालचाल लेते हैं। उनसे पूछा जाता है कि उन्हें उनके अभिभावक के साथ कोई समस्या तो नहीं है। इसके साथ ही बच्चा जिस शहर में रहता है, वहां के सोशल ऑडिटर उससे और उसके अभिभावक से संपर्क कर संस्था को रिपोर्ट भेजते हैं। ध्यान इस ओर दिया जाता है कि बच्चा किसी भी तरह की परेशानी न महसूस करे और अच्छे माहौल में उसका विकास हो।