यूपी के मिर्जापुर जिले के एक गांव में 50 फीट गहरे बोरवेल में गिरी दो साल की मासूम को अथक मेहनत के बाद भी नहीं बचाया जा सका। 12 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मासूम को बाहर निकाला गया तो वह जिंदगी की जंग हार चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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हादसा लालगंज थाना क्षेत्र के बनकी गांव के सहरसा पुरवा की है। सोमवार दोपहर तीन बजे दो साल की दीपांजली बोरवेल में गिरी थी। मंगलवार की भोर में करीब तीन बजे एनडीआरएफ की टीम ने सरिया में फंसाकर जब तक उसे निकाला तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। पुलिस ने पिता सूर्यलाल की तहरीर पर बोरिंग खुला छोड़ने वाले तीन भाइयों नजीर, इदरीश तथा वहीद के विरुद्घ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। तीनों आरोपी घटना के बाद से गांव से फरार हैं।
मासूम के बोरवेल में गिरने की सूचना पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए बोरिंग की बगल में जेसीबी से खुदाई शुरू करा दी थी। पुलिस ने बोरवेल में रस्सी डालकर दीपांजली को निकालने का प्रयास किया लेकिन मासूम के बार-बार रस्सी छोड़ देने से कामयाबी नहीं मिली।
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सोमवार शाम करीब सात बजे तक 15 फीट तक खोदाई करने के बाद जेसीबी चालक ने कहा कि जब तक 50 फीट खोदाई होगी, तब तक बालिका दम तोड़ देगी। तब डीएम और एसपी की मांग पर एनडीआरएफ की 25 सदस्यीय टीम वाराणसी से रात करीब 11 बजे पहुंची।
तत्काल बोरवेल में आक्सीजन डाली गई। कैमरे से लोकेशन लिया गया। 12 घंटे की मशक्कत के बाद टीम ने मंगलवार की भोर करीब तीन बजे सरिया में फंसाकर दीपा को निकाला लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
मिर्जापुर के एसपी आशीष तिवारी ने कहा कि बोरवेल को खुला छोड़ने वाले तीन भाइयों के विरुद्घ आईपीसी की धारा 304 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। तीनों की तलाश शुरू कर दी गई है। लोगों को आगाह किया गया है कि वे बोरवेल खुला न छोड़ें।
कलेजे के टुकड़े की हालत देख बेहोश हुई मां
शव की हालत देख सभी की आंखे हुई नम
- फोटो : अमर उजाला
एनडीआरएफ की टीम ने मंगलवार की भोर में बोरवेल से मासूम दीपांजली उर्फ दीपा को निकाला तो उसकी हालत देख मां संजू देवी बेहोश हो गई। होश में आने पर लाडली को निहारती रही। कहा बिटिया को भूख लगी होगी। वह कल से कुछ नहीं खाई है।
बिटिया ने जब आंख नहीं खोली तो वह दीपांजली से लिपटकर बिलखने लगी। टीम ने दीपा को जिंदा बताते हुए उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले गई जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसकी जानकारी होते ही परिवार के लोग बिलख कर रोने लगे। यह देख सबकी आंखें नम हो गई।
एक दिन पहले सोमवार की सुबह मंजू ने लाडली बेटी दीपांजली को नहला धुलाकर उसे काफी प्यार किया था। सोमवार की दोपहर गांव के ही नजीर के बोरवेल में दीपा के गिरने की सूचना पर पिता सूर्यलाल, मां संजू देवी समेत पूरा परिवार मौके पर पहुंच गया।
उन्हें आस थी दीपा को जिंदा निकाल लिया जाएगा। इसी आस में सभी घटना स्थल पर भोर तक बैठे रहे। रात आठ बजे तक दीपांजली रो रो कर मां को बुला रही थी। बेटी की पुकार सुनकर मां संजू बिलख पड़ी। वह बार बार बेटी को निकालने की बात कह रही थी।
रात करीब आठ बजे बेटी की आवाज नहीं आने पर परिवार के लोग अनहोनी की आशंका से बिलखने लगे थे। पुलिस अधिकारी परिजनों को ढांढस बंधाते रहे। भरोसा देते रहे कि दीपा को जिंदा निकाल लिया जाएगा।
मंगलवार की भोर में तीन बजे से जैसे ही एनडीआरएफ टीम ने दीपांजली को निकाला तो मां संजू उसे देखकर रोने लगी। अस्पताल में बेटी की मौत की पुष्टि होने पर मां बार बार बेहोश हो जा रही थी।
परिजनों ने बताया कि बोरवेल के अंदर कीचड़ था जिसमें दीपांजली फंस गई थी। उसके आंख, कान, मुंह, कीचड़ भर गया था। पूरा शरीर कीचड़ से सना हुआ था। परिजनों ने कहा कि उनकी लाडली ने ऐसी कौन सी गुनाह की थी जिसकी उसे इतनी बड़ी सजा मिली। चार घंटे के दौरान वह काफी तड़पी होगी। यह सोचकर पूरा परिवार रो पड़ा।
चार घंटे अम्मी अम्मी.. चिल्लाती रही नन्ही परी दीपा
बारह घंटे बाद सरिया की मदद से निकाला गया दीपा का शव
- फोटो : अमर उजाला
बोरवेल में गिरी नन्हीं दीपा चार घंटे तक अम्मी अम्मी चिल्लाती रही। रह-रह कर बोरवेल से उसके रोने की आवाज सुनाई देती रही। दीपा के जीवित निकलने की आस में उसकी मां संजू रात भर बोरवेल के बाहर बैठी रही। वह भगवान से नन्हीं परी के लिए प्रार्थना करती रही लेकिन शायद ईश्वर को ये मंजूर नहीं था।
लालगंज थाना क्षेत्र के सहरसा गांव निवासी सूर्यलाल कालीन बुन कर परिवार की जीविका चलाता है। घर में पत्नी संजू के अलावा तीन बच्चों में दो साल की दीपांजलि सबसे छोटी थी। दीपांजलि अपने माता, पिता की सबसे दुलारी बेटी थी।
घरवाले दीपाजंलि को प्यार से दीपा कहकर पुकारते थे। मां घर से बाहर निकलती तो वह मां के साथ ही चल पड़ती थी। सोमवार को भी कुछ ऐसा ही हुआ। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे संजू बैल बांधने के लिए घर से बाहर निकली थी। घर के पास ही खुला बोरवेल है।
संजू के बैल बांधने के दौरान ही बेटी दीपा बोरवेल की ओर तरफ चली गई और फिसल कर उसमें गिर गई। मां का ध्यान गया तो वह बेटी को खोजने लगी। बेटी के इधर उधर न दिखाई देने पर वह बोरवेल की तरफ गई तो बेटी के रोने की आवाज सुनाई दी।
बाद में सूर्यलाल और आसपास के लोग पहुंचे। सौ नंबर पर फोन करने के बाद पुलिस भी पहुंची और इसके बाद बचाव कार्य शुरू हुआ। सूर्यलाल अपनी पत्नी संजू के साथ बेटी का पोस्टमार्टम कराने मंगलवार की सुबह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे।
दोनों का कहना था कि उन्हें आस थी कि बेटी को जीवित को निकाल लिया जाएगा। डीएम विमल दुबे और एसपी आशीष तिवारी समेत अमला मौके पर मौजूद थे। करीब 12 घंटे के अथक प्रयास के बाद मंगलवार की भोर में करीब साढ़े तीन बजे दीपा को सरिया की मदद से बाहर निकाला गया।
दरअसल सोमवार की शाम करीब सात बजे के बाद से ही दीपा की आवाज आनी बंद हो गई थी। देर रात तक उसकी मौत की आशंका जताई जा रही थी। सरिया की मदद से उसे कपड़े में फंसाकर बाहर निकालने का प्रयास किया जाता रहा लेकिन कपड़ा फट गया। बाद में सरिया पेट के किनारे में फंसा तब जाकर शव को बाहर निकाला जा सका।