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काशी विश्वनाथ की सप्तऋषि आरती का विवाद शांत होने पर दो मंत्रियों के समर्थकों में मची श्रेय लेने की होड़

Sun, 24 May 2020 07:08 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी के विद्वान अर्चकों द्वारा की जा रही काशी विश्वनाथ की सप्तऋषि आरती - फोटो : अमर उजाला।
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वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तऋषि आरती का विवाद शांत हो गया है। वहीं सोशल मीडिया पर सूबे के मंत्रियों के समर्थक अपनी-अपनी पीठ ठोकने में लगे हुए हैं। समर्थकों ने वक्तव्य जारी करके अपने-अपने मंत्रियों को इसका श्रेय दिया है। दरअसल, काशी विश्वनाथ धाम में स्थित कैलाश महादेव मंदिर के क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आने के बाद महंत परिवार को सप्तऋषि आरती करने से रोक दिया।

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इस पूरे मामले में धर्मार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी की चुप्पी को देखते हुए स्टांप मंत्री रवींद्र जायसवाल ने मौके पर निरीक्षण किया और  मंदिर प्रशासन को क्लीन चिट दे दी। सात मई से शुरू हुआ सप्तऋषि आरती का विवाद 22 मई को पूरी तरह से शांत हुआ। इसके बाद स्टांप मंत्री रवींद्र जायसवाल के समर्थकों ने यह दावा कि मंत्री के प्रयास से महंत परिवार को उनका अधिकार वापस मिला।

सोशल मीडिया पर जारी संदेशों में समर्थकों ने लिखा कि सप्तऋषि आरती से रोके जाने पर अर्चकों ने मंत्री रवींद्र जायसवाल से हस्तक्षेप का आग्रह किया था। इसके बाद इस मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ, संघ के पदाधिकारियों और पीएमओ कार्यालय से बात करके अर्चकों को उनका अधिकार वापस दिलाया गया।
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काशी विश्वनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
वहीं दूसरी तरफ विप्र समाज के संयोजक पवन शुक्ला ने कहा कि आरती में स्टेट के अर्चकों के शामिल होने के बाद उन्होंने महंत परिवार से संपर्क किया और वस्तुस्थिति को जानकर धर्मार्थ कार्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी से निवेदन किया कि समस्या को जल्द से जल्द दूर किया जाए।

धर्मार्थ कार्य मंत्री ने विप्र समाज के निवेदन को स्वीकार करते हुए महंत परिवार को आरती में शामिल कराने का आश्वासन दिया था। शुक्रवार को महंत परिवार को सप्तऋषि आरती में शामिल होने पर विप्र समाज की ओर से पवन शुक्ला ने धर्मार्थ कार्यमंत्री को धन्यवाद दिया।

 

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