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Sawan: सावन में भोलेनाथ को अर्पित होगी दो करोड़ रुद्राक्ष की मालाएं, एकमुखी की डिमांड; ऐसे करें असली की पहचान

Fri, 11 Jul 2025 09:58 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Rudraksh Mala: सावन महीने की शुरुआत होते ही रुद्राक्ष की मालाएं तेजी से बिकने लगती हैं। कोई गले में पहनता है तो कोई ब्रेसलेट की तरह हाथों में। समय के बदलाव के साथ इसकी डिमांड भी बढ़ गई है। भगवान शिव से जुड़े रुद्राक्ष को पहनने को शाैक दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
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रुद्राक्ष की माला गुहता परिवार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Sawan 2025: भगवान शिव को अतिप्रिय मास सावन में रुद्राक्ष की माला की मांग बढ़ जाती है। इस बार डेढ़ से दो करोड़ रुद्राक्ष की माला भगवान शिव को चढ़ाएंगे। रुद्राक्ष की माला का हब बना काशी से देश-विदेश में भी माला भेजी जाती है। यहां के नेपाल और इंडोनेशिया से कच्चा माल मंगाकर यहां पर माला तैयार की जाती है।

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कारोबारियों का मानना है कि इस बार करीब पांच करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। यहां रुद्राक्ष की दो सौ दुकानें हैं। देश से सभी धार्मिक शहरों में पूरे साल रुद्राक्ष की मांग होती है। मगर, सावन में भगवान शिव को चढ़ाने के लिए बिक्री बढ़ जाती है।

नेपाल और इंडोनेशिया में इसके पौधे हैं, जहां से कारोबारी रुद्राक्ष के दाने मंगाते हैं और यहां से तैयार कर उसे दूसरे राज्यों में भेजते हैं। यहां पर 15 थोक कारोबारी हैं, जो माला तैयार करवाकर बाहर भेजते हैं।

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कारोबारी किशन गिरि ने बताया कि यहां पर पूरे साल रुद्राक्ष की माला तैयार होती हैं। मगर, सावन में बिक्री को देखते हुए चार माह पहले से कच्चा माल मंगाकर माला तैयार करवाते हैं। व्यापारी संजय शर्मा व संतराम पटेल ने बताया कि पंचमुखी माला की मांग ज्यादा होती है। बाहर भी यही भेजा जाता है।

नेपाल का रुद्राक्ष का दाना बड़ा और इंडोनेशिया की छोटी होती है। ज्यादा छोटी दाना की माला की मांग होती है। बिक्रेता सुरेश तुलस्यान ने बताया कि अमूमन सौ रुपये से असली रुद्राक्ष की माला बिकती है। एक से चार मुखी का दाना बिकता है। पांच मुखी की माला बिकती है। इसके पांच से ऊपर के दाने ही महंगे होते हैं। इसकी माला लाखों में बिकती है।

रुद्राक्ष की मालाओं के बढ़े डिमांड। - फोटो : अमर उजाला
अप्रैल से मंगाते हैं कच्चा माल
नेपाल और इंडोनेशिया से अप्रैल से ही कच्चा माला मंगाई जाती है। किशन गिरि ने बताया कि अप्रैल से अगस्त तक कच्चा माल ज्यादा आता है। इससे ठेकेदारों के जरिए प्रोसेसिंग करवाकर माला बनवाई जाती है। हड़हासराय इसकी थोक मंडी है। मगर, रोहनिया, राजातालाब आदि इलाकों के गांवों में खासकर महिलाएं माला बनाती है। हर कारोबारी 15 से 20 लाख माला तैयार करवाते हैं।  

नेपाल में भी जाती है माला: बनारस में तैयार रुद्राक्ष की माला नेपाल में भी भेजी जाती है। मथुरा ज्यादा कंठी माला जाती है। अयोध्या, हरिद्वार, दक्षिण भारत के राज्यों के अलावा दिल्ली, मुम्बई से बाहर निर्यात किए जाते हैं।
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ऐसे करें असली की रुद्राक्ष
रुद्राक्ष की पहचान करने कई तरह से होती है। किशन व संजय ने बताया कि असली रुद्राक्ष के दो दाने को एक-दूसरे के पास लाने पर खिंचाव जैसा महसूस होता है। असली रुद्राक्ष में मुख होता है और ओम की आकृति दिखती है। नकली ज्यादा मुखी वाले रुद्राक्ष नकली होने की संभावना ज्यादा होता है। रुद्राक्ष एक से 18 मुखी भी आता हैं। यही महंगा भी होते हैं। मगर, नकली होने की संभावना इसी में ज्यादा होती है। क्योंकि इसके मुख  बढ़ाकर बेच देते हैं।

पैकेट बंद व प्लास्टिक की भी आई माला
बाजार में रुद्राक्ष कई स्वरूपों में आने लगा है। कंपनियों के पैकेट बंद रुद्राक्ष जो महंगा होता है।  रत्न विशेषज्ञों द्वारा रुद्राक्ष की माला या उसके दाने आकर्षक पैकेट में होते हैं। वहीं, प्लास्टिक की भी माला बिक रही है, जो चिकनी दाना की होती है।

भगवान शिव की आंसू से हुई है रुद्राक्ष की उत्पत्ति
रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर की आंखों के आंसू से हुई है। आचार्य शिवम मिश्र ने बताया कि रुद्राक्ष भगवान शिव से जुड़ा हैं। आमतौर पर भक्तों द्वारा सुरक्षा कवच के तौर पर या ओम नमः शिवाय मंत्र के जाप के लिए पहने जाते हैं। 'रुद्र' भगवान शिव के वैदिक नामों में से एक है और 'अक्स' का अर्थ है 'अश्रु की बूंद' है। भगवान रुद्र के आंसू है। मुखी का अर्थ रुद्राक्ष का मुख है। रुद्राक्ष एक से 21 मुखी आता है।
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