खोजवां स्थित संतोषी माता मंदिर की संपत्ति की लेकर मारपीट और फायरिंग मामले में भेलूपुर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। हिंदू युवा वाहिनी के महामना मंडल उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय पर फायरिंग करने के आरोपी प्रबंध कमेटी के सचिव अतर सिंह और भाई राजबहादुर सिंह को सोमवार को बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर से गिरफ्तार किया गया। इस दौरान लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार लाइसेंस निरस्त करने के लिए उच्चाधिकािरयों को पत्र लिखा जाएगा।
रविवार रात मंदिर की संपत्ति के विवाद को लेकर मंदिर के पुजारी अभिषेक पांडेय को प्रबंध कमेटी के सचिव अतर सिंह ने गोली मार दी थी, इस दौरान मंदिर के अन्य पुजारियों और आक्रोशित मुहल्ले के लोगों ने अतर सिंह और उसके भाई राजबहादुर सिंह को मारपीट कर घायल कर दिया था। पुजारी रवि की तहरीर पर भेलूपुर पुलिस ने आरोपी दोनों भाइयों के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं दूसरे दिन भी इलाके में एहतियातन पुलिस फोर्स तैनात रही। आवाजाही करने वालों पर पुलिस की नजर रही।
सीएम दरबार तक पहुंचा मामला
हिंदू युवा वाहिनी के महामना मंडल उपाध्यक्ष अभिषेक पांडेय पर हमले की घटना से संगठन के शीर्ष पदाधिकारी काफी खफा है। शीर्ष नेतृत्व ने स्थानीय मंडल प्रभारी से मामले की पूरी रिपोर्ट मांगी है। साथ ही मामले से सीएम को भी अवगत कराया है। मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी काफी सवाल उठ रहे हैं। पिछले चार से पांच साल से चले आ रहे विवाद में स्थानीय पुलिस की भूमिका की भी जांच होगी। वाहिनी के मंडल प्रभारी अंबरीष सिंह भोला ने बताया कि सार्वजनिक संपत्ति सार्वजनिक होनी चाहिए। इसे विश्वनाथ मंदिर न्यास ट्रस्ट में शामिल कराके इस पर सार्वजनिक संपत्ति का बोर्ड लगाया जाए।
विश्वनाथ मंदिर न्यास में शामिल हो सकती है संतोषी माता मंदिर की संपत्ति
-धमार्थ कार्य मंत्री बोले, प्रस्ताव आने पर कर सकते हैं अधिग्रहित
वाराणसी। खोजवां के संतोषी माता मंदिर विवाद को लेकर मुहल्ले के लोग भी मुखर होने लगे हैं। इस मामले में धमार्थ कार्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि मोहल्ले और मंदिर से जुड़े लोग प्रस्ताव देंगे तो मंदिर की संपत्ति को विश्वनाथ मंदिर न्यास में शामिल किया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला मंदिर से जुडे़ लोगों को ही करना है। घटना के बाद मुहल्ले के लोेग ने आरोप लगाया कि अतर सिंह अपने सियासी रसूख और प्रभाव के चलते मंदिर पर कब्जा जमा रखा था। यहां तक कि मुहल्ले के किसी को भी मांगलिक कार्यक्रम मंदिर परिसर में नहीं करनेे दिया जाता था।
लोगों ने बताया कि राजस्थान के प्रभुनारायण पालीवाल ने 1960 में तीन बिस्वा जमीन खरीदकर संतोषी माता और शिव मंदिर का निर्माण करवाया था। 1995 के करीब प्रभु नारायण की मौत के बाद मंदिर परिसर की जमीन पर कब्जा शुरू हो गया। 90 के दशक में मुहल्ले के लोगों ने मंदिर में ट्रस्ट बनाया गया तो कब्जेदारों से मुक्त कराने में अतर सिंह और उसके भाई राजबहादुर की अहम भूमिका होने से दोनों भाइयों को सचिव बनाया गया था। धीरे-धीरे अतर सिंह ने मंदिर के पिछले हिस्से में गाड़ी सर्विस सेंटर और बर्तन का कारखाना खोल दिया था। लोगों के विरोध के बाद कारखाना बंदकर अतर सिंह ने बड़ा गेट लगाकर ताला बंद कर अपना कब्जा जमा लिया था। मंदिर के पुजारी के कमरे में भी अतर सिंह ने ताला बंद किया, जोे अभी तक बंद है। आरोप है कि अतर सिंह मंदिर की जमीन पर बहुमंजिला इमारत खड़ी करना चाहता है।