काफी रोचक है इतिहास
भगवान कृष्णेश्वर के निकट रुक्मणीश्वर और सत्यभामेश्वर हैं। पंचमुद्र महापीठ के निकट देवी भद्रा द्वारा स्थापित भद्रेश्वर लिंग और देवी जाम्बवंती द्वारा जाम्बवतीश्वर लिंग स्थापित है। इसके साथ ही काशी में गंगा के तट पर 24 स्थानों पर और शहर में 108 स्थानों पर गोपालस्वरूप में श्रीकृष्ण विराजमान हैं।
काशी के 24 माधव बिन्दुमाधव पंचगंगाघाट, शेषमाधव राजमन्दिर, शंखमाधव शीतलाघाट, ज्ञानमाधव ज्ञानवापी पांचों पांडव मंदिर, श्वेतमाधव हनुमानमन्दिर में देवी विशालाक्षी के समीप, प्रयागमाधव राम मंदिर दशाश्वमेधघाट, वैकुंठमाधव सिन्धियाघाट, वीरमाधव आत्मवीरेश्वर मंदिर गेट पर।
कालमाधव काठ की हवेली कालभैरव समीप, आदिकेशव राजघाट, ज्ञानकेशव आदिकेशव के बगलमें, तार्थ्यकेशव आदिकेशवके समीप, नारदकेशव प्रह्लादघाटपर, प्रह्लादकेशव प्रह्लादघाट, आदित्यकेशव आदिकेशव के पास, भृगुकेशव गोलाघाट, वामनकेशव अर्थात् मधुसूदन त्रिलोचन, हयग्रीवकेशव माता भदैनी, भीष्मकेशव मृत्युंजय महादेव, निर्वाणकेशव लोलार्क, त्रिभुवनकेशव बंदीदेवीमंदिर दशाश्वमेध घाट, गंगाकेशव ललिताघाट, नरनारायणकेशव मेहताघाट, गोपीगोविन्दकेशव लालघाट पर हैं।