केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर ने भले ही तीन तलाक के मामले में चुनाव बाद बड़ा फैसला लेने की घोषणा कर राजनीतिक बहस का मुद्दा छेड़ दिया हो लेकिन मुस्लिम जानकारों का कहना है कि ऐसे बयान से कुछ होने वाला नहीं है।
तीन तलाक का मुद्दा शरीयत का मुद्दा है। सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि चुनाव से पहले एक बार फिर तीन तलाक का मुद्दा केंद्र सरकार ने छेड़ा है। जो लोग ऐसा बयान दे रहे हैं वो मुगालते में हैं कि इससे उनका वोट बैंक बढ़ेगा जबकि ऐसा कुछ नहीं होने वाला।
रही तीन तलाक की बात तो इस पर कोई फैसला सरकार नहीं ले सकती। ये मामला शरीयत का है।
काजी-ए-शहर मौलाना गुलाम यासीन का कहना है कि तीन तलाक का मसला इस्लामिक कानून का है। इसमें सरकार का कोई दखल नहीं हो सकता।
इस बारे में अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन शकील अहमद बबलू कहते हैं कि तीन तलाक का मुद्दा इस्लाम और अकलियत का है।
इस पर अकलियत के लोग ही फैसला ले सकते हैं। बीजेपी सरकार ऐसी बहस छेड़कर लोगों को बरगला रही है।