ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन तलाक और अवैध बूचड़खानों के मांस को हराम करार देने को कुछ आलिम सही ठहरा रहे हैं तो कुछ का मानना है कि आखिर अवैध बूचड़खानों के मांस खाने का सवाल आज ही क्यों उठाया जा रहा है।
मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि तीन तलाक को जो लोग हराम ठहरा रहे हैं, असल में उनका हकीकत से ताल्लुक नहीं है। जमीअत-उल-उलेमा जिला बनारस के अब्दुल्ला फैसल कहते हैं कि तीन तलाक की जो मुखालफत कर रहे हैं, उन्होंने कुरान और हदीस नहीं पढ़ी है। कहा, अवैध बूचड़खाने तो पहले से चल रहे हैं। मुद्दा आज क्यों बन रहा है।
सैयद फरमान हैदर का कहना है कि जब संविधान ने हमारे खाने पीने पर रोक नहीं लगाई तो कोई और कैसे कर सकता है? रही बात तीन तलाक की तो इस पर तो कोई गुफ्तगू ही नहीं होनी चाहिए।
वहीं मौलाना हसीन का कहना है कि क्या खाएं क्या न खाएं, जब संविधान पर इस पर कोई पाबंदी नहीं लगाई तो हमें या आप को इस पर बोलने का कोई हक नहीं। अवैध बूचड़खाने का गोश्त नहीं, बल्कि चोरी, डाका और किसी को धोखा देकर जो रोटी खाए जाए वो हराम है।
वहीं शिया पर्सनल ला बोर्ड द्वारा तीन तलाक को हराम करार देने और गो हत्या पर पूरी तरह पाबंदी की मांग और अवैध बूचड़खाने बंद कराने के फैसले को जायज बताने को शिया मुसलमानों ने एकदम सही बताया है। अयोध्या में राम मंदिर के सवाल पर उनका कहना है कि उच्चतम न्यायालय जो भी फैसला दे उसका सभी को सम्मान करना चाहिए।