नागरी नाटक मंडली में सुर गंगा संगीत महोत्सव
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‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाय के...’ जैसे सूफी गीतों, भजनों से सोमवार की रात चहक उठी। काशी के मशहूर भजन गायकों ने सूर, तुलसी, कबीर के भजनों को सुरों से सजाया। उभरते कलाकारों ने भी सूफी गायन से वाहवाही बटोरी।
सुर गंगा संगीत महोत्सव की सोमवार की निशा संत कबीर को समर्पित थी। बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय के भजनों से शुरुआत हुई। उन्होंने सबसे पहले कबीर को समर्पित भजन- साधो गगन घटा गहरानी... की प्रस्तुति की।
इनके बाद डॉ. अंजू भारती ने मंच संभाला। उन्होंने- उधो मन ना भावे... के बाद मैं धरूं तिहारो ध्यान... की प्रस्तुति से माहौल बनाया। फिर युवा गायक पीयूष मिश्रा और सौरभ मिश्रा ने भजन सुनाए।
नरेंद्र शुक्ला ने- भज मन राम चरन सुखदाई की प्रस्तुति की तो नीतिश कुमार पांडेय ने- हे शंभू बाबा मेरे भोले बाबा... पर सुर लगाए। नीरज पांडेय ने- बोले पिंजरे का तोता राम... और सरिता आर्या ने- राम नाम अति मीठा है... की प्रस्तुति की।
इनके बाद सौरभ त्रिपाठी ने- जय जय जग जननी देवी... की प्रस्तुति की तो ममता उपाध्याय ने- जेकर नाथ भोले नाथ... सुनाकर भाव विभोर किया। अभिषेक सिंह, आदित्य धनराज पांडेय, निखिल कुमार चक्रवाल, ज्योति यादव ने भी भाव विभोर किया।
ताहिर वारसी ने- शिरडी वाले साईं बाबा के अलावा कई भजनों से संत कबीर को स्वराजंलि अर्पित की। राहुल त्रिपाठी ने सूफी गीत- छाप तिलक सब छीनी रे.. की प्रस्तुति से माहौल बनाया।