प्रो. आशीष अग्रवाल के अनुसार, इस तकनीक का सफल परीक्षण कोशिकाओं और पशुओं पर किया जा चुका है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में एनिमल स्टडी कहा जाता है। इन परीक्षणों में सकारात्मक परिणाम मिले हैं, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में यह तकनीक दंत चिकित्सा में बड़ा बदलाव ला सकती है। फिलहाल इस डिवाइस के पेटेंट की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही मानव परीक्षण (ह्यूमन क्लिनिकल ट्रायल) की तैयारी की जा रही है।
इस शोध की खास बात यह है कि इसका उपयोग केवल दांतों के उपचार तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में इस माइक्रो स्मार्ट चिप का इस्तेमाल हड्डी संबंधी रोगों (ऑर्थोपेडिक) और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की थेरेपी में भी किया जा सकता है। यह तकनीक मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक नई दिशा खोल सकती है।
बीएचयू के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। आने वाले समय में यह डिवाइस मरीजों के इलाज को अधिक सहज, कम समय वाला और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।