कुशीनगर में गुरुवार को ट्रेन की चपेट में स्कूली वैन के आ जाने से 13 मासूम बच्चों की जान चली गई। घटना को लेकर बच्चों की मौत का कारण बनी पैसेंजर ट्रेन के पायलट का दर्द रह-रहकर छलक रहा है। उनको बहुत गहरा सदमा लगा है।
वह बार-बार यही कह रहे हैं कि काश...काश मैं मासूमों की जान बचा पाता। काश....मैं कुछ कर पाता। कुशीनगर में 13 स्कूली बच्चों की मौत का कारण बनी पैसेंजर ट्रेन के पायलट डीरेका निवासी विजय शंकर यादव उस भयंकर मंजर को भूल नहीं पा रहे हैं।
वह सदमे की हालत में हैं। हादसे का जिक्र करते हुए कभी लंबी चुप्पी साध लेते हैं तो कभी दहाड़े मारकर रोने लगते हैं। फोन पर हुई वार्ता में विजय ने बताया कि वह शेड्यूल पर समय से ट्रेन चला रहे थे।
अचानक ड्राइवर स्कूल वैन लेकर आ गया। उन्होंने कहा कि वैन से टक्कर लगने के बाद वह पैसेंजर ट्रेन को रोक भी नहीं पाए क्योंकि आक्रोशित भीड़ से यात्रियों को खतरा हो सकता था। विजय का परिवार डीरेका में रहता है और वह गोरखपुर में कार्यरत हैं।