वाराणसी शहर में जाम का बड़ा कारण स्कूली बस और स्कूल प्रबंधन की अव्यवस्था भी है। सुबह सात से 10 बजे और दोपहर में 12 से दो बजे तक यातायात का दबाव इतना होता है कि सड़क पर राहगीर फंसते हैं। स्कूल के बाहर छुट्टी के समय कोई व्यवस्था नहीं होने और अभिभावकों के साथ ही स्कूल वाहनों के सड़क पर खड़े होने की वजह से भीषण जाम लगता है।
संभागीय परिवहन विभाग के अनुसार, जिले के 2800 से अधिक निजी स्कूलों में बच्चों को लाने और घर तक पहुंचाने के लिए 5000 वाहनों का संचालन हो रहा है। 500 से अधिक बसें ब्लैक लिस्टेड भी हैं। छोटे-बड़े स्कूली वाहनों से शहर के अंदर जाम की समस्याएं हैं।
यातायात पुलिस की ओर से स्कूल प्रबंधन को कई बार नोटिस और हिदायत दी गई कि पार्किंग की व्यवस्था और निजी गार्ड के जरिये स्कूल के बाहर यातायात सुगम बनाएं। हालांकि, आदेश के 10 से 15 दिन तक काम होता है। उसके बाद स्थिति जस की तस हो जाती है।
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बरेका गेट के पास स्कूल की छुट्टी के समय और लंका, भगवानपुर, लहरतारा, सिगरा, सामनेघाट, पहड़िया, अर्दली बाजार, भोजूबीर, शिवपुर, सारनाथ लेढूपुर, मंडुवाडीह चौराहा, शिवदासपुर, ककरमत्ता, वरुणा, मढ़ौली, पड़ाव, रामनगर, पांडेयपुर, कमच्छा और शिवपुर में स्कूलों की छुट्टी होते ही 15 से 20 मिनट तक यातायात रोक दिया जाता है।
दोनों तरफ राहगीरों के वाहनों के पहिये थम जाते हैं। बरेका और भगवानपुर, लहरतारा, वरुणा क्षेत्र में लंबा जाम लगता है। अधिकतर स्कूल, कॉलेज के पास यातायात व्यवस्था के लिए खुद के कर्मचारी भी नहीं हैं।