जिसके कारण सड़कें जल्दी उखड़ने लगती है। डाफी टोल प्लाजा से प्रतिदिन चार सौ से ज्यादा ट्रैक्टर गुजरते हैं जिसमें सौ से ज्यादा तो बालू लदे होते हैं। मनीष कुमार ने बताया कि सरकार ने ओवरलोड चलने वाली वाहनों से 10 गुना तक लगने वाला जुर्माना हटाकर सिर्फ मामूली वसूली बढ़ाई है।
ओवरलोड न दिखे इसके लिए ट्रांसपोर्टर और ट्रक चालक ऊपर से तिरपाल लगाकर ढक दे रहे हैं। ओवरलोड गाड़ियों की बढ़ती संख्या को लेकर एनएचएआई और टोल वसूली करने वाली कंपनी के अधिकारी परेशान हैं। सोनभद्र, मिर्जापुर, बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड से आने वाले लाल बालू, गंगा बालू, मोरंग, गिट्टी, बोल्डर, कोयला लादकर चलने वाले वाहनों की संख्या ज्यादा है।
ओवरलोडिंग करने वाले वाहन फर्जी या बिना नंबर के गंगा पुल पर ही गाड़ी से फास्टैग हटा देते हैं। जिससे सिर्फ टोल वसूली से कुछ ज्यादा पैसे देकर पार हो जाते हैं। खाली जाते समय फास्टैग लगाकर चलते हैं ताकि जुर्माना न लगे।
टोलप्लाजा हेड मनीष कुमार ने बताया कि 15 फीसदी ओवरलोड ट्रकें बिना नंबर या गलत नंबर लगाकर चलते हैं। परिवहन विभाग टोल प्लाजा के नंबरों के आधार पर चालान कर देता है जिसके बाद कई ट्रक और कार चालक टोलप्लाजा पर आकर विवाद करते हैं। सरकार द्वारा दी गई छूट का लोग गलत फायदा उठाते हैं।