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Varanasi News: आज घर से मंदिरों तक गूंजेगा नंद के आनंद भयो...

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वाराणसी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी व्रजधाम सरीखी दिखेगी। घर से मंदिरों तक श्रद्धा और भक्ति का सागर लहराएगा। ‘नंद के आनंद भयो...’ की देर रात तक गूंज होगी। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, इस्कॉन मंदिर, गोपाल मंदिर आदि मंदिरों के अलावा माहेश्वरी भवन, बीएचयू, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रावासों, अन्य शिक्षण संस्थानों, प्रतिष्ठानों और पुलिस लाइन में कान्हा के जन्मोत्सव का उल्लास दिखेगा।
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बृहस्पतिवार को मंदिरों से लेकर घरों तक को सजाने में लोग जुटे थे। बाजार में लोगों ने कान्हा, राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं, उनके वस्त्र सहित विभिन्न तरह की शृंगार व पूजन सामग्री की खरीदारी की। पांच साल बाद इस बार गृहस्थ और वैष्णव दोनों एक साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। बृहस्पतिवार को शहर के प्रमुख मंदिरों में, जहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है, तैयारियां चलती रहीं। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में श्रीकृष्ण जी की झांकी सजाई गई है। इस्कॉन मंदिर में आकर्षक सजावट की गई है। चौक, बांसफाटक, रथयात्रा, सिगरा, लहुराबीर, गोदौलिया, लंका, मैदागिन, मंडुवाडीह आदि इलाकों में सजी अस्थायी दुकानों पर राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं, वस्त्र, पालना, इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के अलावा शृंगार और पूजन सामग्री की खरीदारी हुई।
इस बार उदया तिथि और रोहिणी नक्षत्र की अष्टमी एक ही दिन होने से दुर्लभ संयोग बना है। इससे जयंती नामाष्टमी योग बन रहा है। विशिष्ट योग में गृहस्थ और वैष्णव दोनों कान्हा का जन्मोत्सव मनाएंगे। मंदिरों, मठों, आश्रमों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लास रहेगा। मध्यरात्रि में प्रभु के जन्म के साथ ही उत्सव शुरू हो जाएगा। प्रभु के जन्मोत्सव पर व्रत रखकर पूजा करने से पुण्य, सिद्धियों की प्राप्ति और मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। ज्योतिषविदों के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र बृहस्पतिवार की रात 12:43 बजे से अगले दिन उदया तिथि में शुक्रवार की रात 11:12 बजे तक है। जबकि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि बृहस्पतिवार की रात 1:33 बजे से शुक्रवार की रात 11:13 बजे तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र, अष्टमी तिथि तथा औदायिक रोहिणी तीनों के मिलने से वैष्णव और गृहस्थ एक साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे।
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