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आज की कविताओं में नजर आ रहा प्रतिरोध

Sat, 27 Feb 2016 02:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
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बीएचयू के राधाकृष्णन सभागाम में शुक्रवार को हिंदी विभाग के शोध छात्रों की ओर से आयोजित युवा कवि संगम में वर्तमान कविता के विविध पक्षों पर चर्चा की गई। ‘हमारा समय और आज की हिंदी कविता’ विषयक गोष्ठी सत्र की अध्यक्षता करते हुए कवि आलोक धन्वा ने कहा कि कविता का समय अनेक कठिन समय से मिलकर बना है। इसलिए आज की कविताओं में प्रतिरोध नजर आता है।
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मुख्य अतिथि कवि राजेश जोशी ने कहा कि अमीर खुसरो से आज तक के समय की पहचान बोलचाल की कविता में ही संभव है। आज की हमारी कविता हमारे समय के खतरों का चित्रण करने में सक्षम है। कवि अष्टभुजा शुक्ल ने कहा कि हमारा समय इतना गतिशील है कि कविता उसे पकड़ पाने में पूरी तरह सफल नहीं है।

कवयित्री कात्यायनी, युवा आलोक वैभव सिंह आदि ने भी अपने विचार रखे। संचालन डॉ. रामाज्ञा शशिधर ने किया। स्वागत हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अशोक सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो. श्रद्धा सिंह ने किया। वहीं दूसरे सत्र में अष्टभुजा शुक्ल, राज्यवर्धन पंकज चतुर्वेदी, प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी, अरुण शीतांश, कात्यायनी, विपिन चौधरी, रेणु मिश्र, बाबुषा कोहली, विहाग आर्यभारत आदि ने कविता पाठ किया।
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कार्यक्रम संयोजक अरमान आनंद ने बताया कि शनिवार को सुबह 11 बजे से काव्य पाठ और उसके बाद रूपवाणी संस्थान की ओर से व्योमेश शुक्ल के निर्देशन में ‘राम की शक्ति पूजा’ का नाट्य मंचन होगा।
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