फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आज समाप्त होगा खरमास, नहीं शुरू होंगे मांगलिक कार्य

Thu, 14 Jan 2021 04:46 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
खरमास 2021 - फोटो : गूगल
विज्ञापन

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। बावजूद इसके मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। गुरु और शुक्र के अस्त होने के कारण 17 अप्रैल तक सभी मांगलिक कामों पर रोक लगी रहेगी। हालांकि 16 फरवरी को वसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त मानते हुए कई जगह विवाह होंगे।

विज्ञापन

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि गुरु 16 जनवरी को अस्त हो रहा है और 12 फरवरी को उदित होगा। वहीं शुक्र 16 फरवरी से 17 अप्रैल तक अस्त होगा।

देवगुरु बृहस्पति धर्म और मांगलिक कामों के कारक ग्रह हैं। इसलिए गुरु अस्त हो जाने पर मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। शुक्र अस्त होने के दौरान शुभ काम नहीं किए जाते हैं। बृहत्संहिता ग्रंथ में कहा गया है कि शुक्र के अस्त होने से मौसम में अचानक बदलाव होने की संभावना बनती है। अस्त होने पर शुक्र का प्रभाव कम हो जाएगा। इस साल शुक्र तारा 61 दिनों के लिए अस्त हो रहा है। पिछले साल सिर्फ आठ दिन के लिए अस्त हुआ था।
विज्ञापन



शुक्र गुरु अस्त होने पर निषिद्ध कार्य
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि गुरु शुक्र अस्त होने पर फल प्राप्ति की कामना से किए जाने वाले सभी काम पर निषेध होता है।
कुएं, बावली, तालाब, बोरिंग खोदना और उनकी प्रतिष्ठा करना।  
बाग आदि का आरंभ और प्रतिष्ठा
किसी भी प्रयोजन के व्रतों का आरंभ और उद्यापन
जन्म के 6 महीने बाद होने वाले सभी संस्कार जैसे कर्णवेध, मुंडन, यज्ञोपवीत, समावर्तन, विवाह, वधुप्रवेश, द्विरागमन
पृथ्वी, तुला आदि के 16 महादान, सोमादि यज्ञ, अष्टका श्राद्ध, गोदान, प्रथम उपाकर्म, वेदारंभ, नियत काल में बालकों के न किए हुए संस्कार
देव प्रतिष्ठा, प्रथम बार की तीर्थयात्रा एवं देव दर्शन, संन्यास ग्रहण, अग्निपरिग्रह, राज्याभिषेक, प्रथम बार राजा का दर्शन, अभिषेक, प्रथम यात्रा, चातुर्मासीय व्रतों का प्रथमारंभ आदि अधिमास में वर्जित हैं।

गुरु शुक्र अस्त होने पर किए जाने वाले काम
परंतु अलभ्य योगों के प्रयोग, अनावृष्टि के अवसर पर वर्षा हेतु विहित पुरश्चरण, ग्रहण कालिक स्नान, दान, श्राद्ध और जपादि, पुत्र जन्म के कृत्य और पितृमरण के श्राद्धादि तथा गर्भाधान, पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण और अन्नप्राशन संस्कार नया वस्त्र खरीदना एवं धारण करना, आभूषण क्रय, फ्लैट, मकान, टीवी, फ्रिज, कूलर, एसी, नया वाहन और नित्य उपयोग की वस्तुओं को खरीदना और प्रथम बार उपयोग करना भी शुभ होता है। अस्त में नये रत्न-आभूषणों की खरीदारी कर सकते हैं। गुरु-शुक्र अस्त में इन्हें धारण नहीं करना चाहिए।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें