वहीं काशी विद्यापीठ विकास खंड के सरहद पर निगरानी बनाए हुए सहायक कृषि रक्षा अधिकारी अवधेश सिंह का कहना है छोटे टिड्डी दल में टिड्डियों की संख्या 50 हजार से एक लाख तक हो सकती। जिनसे बचाव के लिए थाली और ढोल बजाकर शोर मचाना और खरपतवार को जलाकर धुआं करना शामिल है।
नीम की पत्ती, सुरती की गांठ और लहसुन के संयुक्त घोल को उबालकर छिड़काव करने से फसल को बचाया जा सकता है। गोबर के घोल का छिड़काव भी काफी असरदार है।