भारत में रहने वाले तिब्बतियों की समस्या जानने के लिए निर्वासित तिब्बत सरकार के दो सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान सारनाथ पहुंचा। यहां उन्होंने कुलपति प्रो. गेसे नवांग समतेन से मुलाकात कर पठन-पाठन सहित अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
निर्वासित तिब्बत सरकार की सांसद त्सेरिंग ल्हामो और तेनजिंग छोजिन ने कुलपति से बातचीत में कहा कि तिब्बत में स्वायतता लाने का प्रयास अहिंसा के माध्यम से जारी रहेगा। भारत चीन सीमा विवाद पर कहा कि तिब्बत-भारत के साथ है। निर्वासित तिब्बती सरकार को भारत सरकार से उम्मीद है कि वह भी हमारा हर पहलू पर सहयोग करेंगे। तिब्बत की स्वायतता के लिए आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा भी चीन सरकार से कई चक्र में वार्ता कर चुके हैं। हालांकि अभी तक कोई लाभ नहीं मिला।
उन्होंने कहा, भारत में व्यापार करने वाले तिब्बती व्यापारियों की आर्थिक स्थिति खराब है। वे कर्ज के बोझ में लदे हैं। उनके द्वारा भारत मे लगाए जाने वाले बाजार स्थायी नहीं हैं। भारत सरकार उन्हें यदि लीज पर कुछ जमीन मुहैया करा दे तो उन्हें काफी हद तक सहयोग मिल सकता है। इसके लिए भारत सरकार को पत्र लिखा जाएगा। तिब्बती सांसदों ने बरईपुर स्थित निगमा इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट, खजुहीं स्थित वज्र विद्या संस्थान व गंज स्थित तिब्बती बौद्ध मंदिर का भ्रमण किया। इसके बाद गंगा आरती देखने निकल गए।