उन्होंने अपने जीवन में जो भी काम किया लय के साथ ही किया। लोगों द्वारा उन्हें ‘अप्पा जी’ बुलाये जाने की कहानी भी मजेदार है। दरअसल, उन्हें अपनी बहन के बेटे से बहुत लगाव था और उनकी बहन के बेटे ने जब बोलना शुरू किया तो सबसे पहले उन्हें ही अप्पा कहकर बुलाया। इसके बाद उनके घर-परिवार में भी सबने उन्हें अप्पा कहना शुरू कर दिया और इस तरह से वह अप्पा जी बन गईं। 24 अक्तूबर 2017 को कोलकाता में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।
साल 1972 में पद्मश्री, साल 1989 में पद्मभूषण और साल 2016 में उन्हें पद्मविभूषण की उपाधि मिली। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला।