दोपहर करीब साढ़े 12 बजे अचानक कमरे से तेज धुआं निकलने पर परिवार के लोगों की नजर पड़ी तो वह दरवाजा पीटकर अंदर सो रही सविता व बच्चों को जगाने लगे। काफी कोशिशों के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो कुंडी तोड़कर लोग अंदर पहुंचे। वहां भीषण आग लगी हुई थी।
बिजली के उपकरण व तार जल रहे थे। लकड़ी का बेड, गद्दा, फर्नीचर सहित सब आग में जल गए थे। सविता और दिव्यांश की मौत हो चुकी थी। दिग्विजय की सांस चल रही थी। आनन-फानन में उसे मड़ियाहूं सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की खबर पाकर लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने मौके पर छानबीन की। आग लगने का कारण शार्ट-सर्किट को ही माना जा रहा है। कोतवाल पवन उपाध्याय ने बताया कि शव को कब्जे में लिया गया है। छानबीन की जा रही है।