बैनामा पांच जुलाई 2025 तक होना था। 23 मई 2025 को 10 लाख रुपये का चेक दिया। इसके बाद 10 जून 2025 को कारोबारी की पत्नी सपना अग्रवाल ने 65 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से दिए। 75 लाख रुपये और आरटीजीएस से रचना अरोड़ा के खाते में भेजे गए। इस तरह कुल डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान ऑनलाइन किया गया।
डेढ़ करोड़ रुपये ऑनलाइन और डेढ़ करोड़ रुपये नकद दिए गए। डेढ़ करोड़ रुपये प्राप्त करने के बाद मीरा अरोड़ा और रचना अरोड़ा ने 500 रुपये के स्टांप पेपर पर विक्रय अनुबंध पत्र तैयार किया। इसमें भवन की कीमत एक करोड़ सत्तर लाख रुपये लिखी गई।
अनुबंध में कहा गया कि डेढ़ करोड़ रुपये से भवन को केनरा बैंक से बंधक मुक्त कराया जाएगा। बाद में 10 अगस्त 2025 को आनंद कृष्ण अग्रवाल ने डेढ़ करोड़ रुपये नकद दिए। यह भुगतान अखबार के कार्यालय में किया गया। 14 अगस्त 2025 को रचना अरोड़ा की स्टाफ कृतिका मिश्रा ने नगर निगम का पीला कार्ड दिया।
इस कार्ड से पता चला कि भवन रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के नाम पर दर्ज है। नगर निगम के रिकॉर्ड में भवन का कब्जा राजीव कुमार अरोड़ा के नाम पर था। थाना प्रभारी दिलीप कुमार मिश्रा ने बताया कि दर्ज प्राथमिकी पांच आरोपियों में तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है।