यूपी के बलिया में पुलिस ने डीआईजी, आईजी तथा मंत्री का पीआरओ बताकर अधिकारियों और पुलिसकर्मियों से वसूली करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
दो दिन पूर्व बांसडीह चौकी के सिपाहियों को आरोपियों ने धमकाते हुए वर्दी उतरवाने की धमकी दी थी। यहां तक कि बलिया की एसपी को भी तीनों फोन कर चुके हैं।
पुलिस की माने तो पकड़े गए आरोपी अधिकारियों पर दबाव बनाकर वसूली करते थे। यहां तक कि बलिया एसपी, बांसडीह सीओ व चौकी प्रभारी के यहां भी इनके फोन आ चुके हैं।
बांसडीह चौकी प्रभारी उमेश चंद्र यादव के मोबाइल पर भी शनिवार को इन लोगों ने फोन कर एक मामले में दबाव बनाया। यहीं से मामला खुलना शुरू हुआ। फोन पर आरोपी ने बताया कि वीरेंद्र यादव बोल रहा हूं।
कमलेश पटेल का क्या हुआ। विगत दिनों मीना पटेल के घर कोई पूछताछ के लिए गया था गया। चौकी इंचार्ज से उसने बदसलूकी भी की। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
धमकाकर करते थे धन उगाही
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मुखबिर की सूचना पर कोतवाली प्रभारी संजय कुमार त्रिपाठी, एसआई प्रताप नारायण, अजय यादव, उमेश यादव के साथ बघौता मोड़ पर बाइक चेक करने लगे। जहां बलिया की तरफ से एक बाइक पर तीन युवक आते दिखे।
जिन्हें पुलिस ने रोकना चाहा तो वे मुड़कर भागने लगे लेकिन पुलिस ने बघौता के पास पकड़ लिया। बाइक पर पुलिस का मोनोग्राम लगा हुआ था और नंबर नहीं था।
पुलिस की पूछताछ में तीनों ने बताया कि वे मंत्री, डीआईजी, आईजी का पीआरओ बनकर पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों व नेताओं को धमकाकर धन उगाही करते थे।
पकड़े गए आरोपी चंदन धोबी निवासी ग्राम गोठहुली, वीरेंद्र यादव निवासी ग्राम महरेव, पवन गुप्ता निवासी वार्ड नंबर-11 हैं। इस गिरोह का मुख्य सरगना चंदन है। चौकी प्रभारी उमेश चंद्र यादव के तहरीर पर मामले में मुकदमा दर्ज कर तीनों को जेल भेज दिया गया।
बलिया की पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली ने बताया कि उन्हें भी कई बार मंत्री का पीआरओ बनकर तीनों ने फोन किया। जिसकी जांच पड़ताल शुरू करवाई तो पता चला कि फर्जी हैं। जिनकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई थी।