बाढ़ से घिरे पिपरी गांव में नाद ओर गोमती का पानी तो 10 इंच कम हुआ लेकिन दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। हफ्ते भर से राहत के चंद टुकड़ों में पेट की आग बुझाने और भय के साये में रात काट रहे ग्रामीणों को कोई राहत मिलती नहीं दिख रही। शासन, प्रशासन का रवैये ने बाढ़ पीड़ितों की चिंता बढ़ा दी है।
चौबेपुर संवाददाता के अनुसार अजाश्व, बर्थरा खुर्द, गरथौली, मठिया, भगवानपुर, कुर्सिया, हरिहरपुर, धौरहरा, टेकुरी, लक्ष्मीसेनपुर और राजवारी आदि गांवों के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि सरकार मदद के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। न तो ठीक से भोजन मिल रहा और न पशुओं के लिए चारा। गुरुवार को इन गांवों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. आरबी यादव के नेतृत्व में चिकित्सकों ने दवाइयां बांटीं।
वहीं, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. पीके श्रीवास्तव के नेतृत्व में पशुओं को टीके लगाए गए। इसी तरह गंगा की बाढ़ से घिरे सरसौल, लुठा, शिवदशा, परनापुर, मुरीदपुर, गौराउपरवार, चंद्रावती, कैथी, ढकवा, रामपुर, मुस्तफाबाद, अंबा, अमौली और कुकुढहां आदि गांवों में भी पीड़ितों की चिंताएं बढ़ गई हैं। चिरईगांव संवाददाता के अनुसार ढाब क्षेत्र में पीएसी प्रभारी डॉ. सुनील कुमार ने पहुंचकर स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। वहीं, बीडीओ सुरेंद्र प्रसाद भी बाढ़ में फंसे लोगों की समस्या जानने पहली बार पहुंचे।