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Varanasi News: त्योहारों की छुट्टी के चलते इस बार धान खरीद 4 से होगी शुरू

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त्योहारों की छुट्टी के चलते इस बार धान की खरीद 4 से शुरू होगी
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जिले के 35 क्रय केंद्रों से फरवरी तक होगी खरीद, 33 हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। त्योहारों की छुट्टी के चलते इस बार धान की खरीद 4 नवंबर से शुरू होगी। जिले में 35 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद होगी। केंद्रों पर बैठने से लेकर पेयजल की व्यवस्था रहेगी। अब तक 1200 किसानों ने बिक्री के लिए पंजीकरण करवाया है। इस बार 33 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य है। ए ग्रेड धान 2320 रुपये और सामान्य 2300 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा।
धान की खरीद एक नवंबर से शुरू होनी थी, लेकिन दीपावली, अन्नकूट व रविवार की छुट्टियों के चलते सोमवार से सभी केंद्रों पर खरीद होगी। जिला विपणन व खाद्य अधिकारी सुनील भारती ने बताया कि 35 क्रय केंद्रों पर ई-पॉश मशीन से खरीद होगी। सभी एजेंसियों को खरीद के लक्ष्य दिए गए हैं। सबसे ज्यादा विपणन को 20 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला है। जिले में 50457 हेक्टेयर में धान की बोआई हुई है। प्रति हेक्टेयर 31.76 क्विंटल और 160.260 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होने का अनुमानित है। इस बार राइस मिलों का पंजीकरण बजाय लखनऊ से हो रहा है।
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इन केंद्रों पर होगी खरीद
चिरईगांव ब्लाक में गौराकला प्रथम व द्वितीय, साधन सहकारी समिति नारायणपुर, लाल्हूपुर, छाही गोपपुर, चोलापुर में चोलापुर एट रौनाकला प्रथम व द्वितीय, कादीपुर, साधन सहकाी समिति रौनाकला, चोलपुर, काशी विद्यापीठ में पहड़िया मंडी, मंडी समिति बच्छावं प्रथम व द्वितीय, पिंडरा में पिंडारा एट मरुई प्रथम व द्वितीय, साधन सहकारी समिति फूलपुर, मरुई छताव, बाबतपुर, बड़ागांव में बड़ागांव एट गांगखुर्द बगिया प्रथम, द्वितीय, साधन सहकारी समिति हरिनाथपुर, अनेई, कनियर, हरहुआ एट गोसाईपुर मोहाव प्रथम, द्वितीय, भटौली, आराजीलाइन में मिल्कीचक प्रथम, द्वितीय जयापुर, साधन सहकारी समिति मिर्जामुराद, कचनारकुर्मी, देउरा, सेवापुरी में सेवापुरी एट तक्खू की बौली प्रथम, द्वितीय, साधन सहकारी समिति कपसेठी धान खरीद के केंद्र बनाए गए हैं।
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अब व्यापारी किसान के नाम पर नहीं कर पाएंगे बिक्री
सुनील भारती ने बताया कि अब व्यापारी किसान के नाम पर धान नहीं बेच पाएंगे। इस बार पंजीकरण उन्हीं किसानों का हो रहा है, जो धान की बोआई किए हैं। क्योंकि ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान खसरा भी दिखाई देता है। पहले व्यापारी किसानों से पंजीकरण करवाकर धान की बिक्री कर लेते थे।
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