राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को वाराणसी के दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित कार्यक्रम में 10 युवाओं को अपने हाथ से नियुक्ति पत्र दिए। नियुक्ति पाने वाले छात्रों ने कौशल विकास कार्यक्रम के तहत अलग-अलग संस्थानों में अलग-अलग विधाओं में प्रशिक्षण प्राप्त किया। बाद में निजी कंपनियों में इनकी नियुक्ति की गई है।
सोमवार को कुल 1310 युवकों-युवतियों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। इनमें 10 युवाओं को राष्ट्रपति के हाथ से नियुक्ति पत्र मिले हैं। अन्य 1300 को कौशल विकास मिशन के अधिकारियों ने नियुक्ति पत्र दिए।
राष्ट्रपति के हाथ से नियुक्ति पत्र पाने वाले सभी युवक-युवतियां इस पल के भागीदार बनकर गौरवान्वित हुए। उन्होंने अपनी नियुक्ति को बड़ी जिम्मेदारी बताया। इस दौरान नियुक्ति पत्र देेने वाली कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
मैंने कभी नहीं सोचा था कि राष्ट्रपति के हाथों नियुक्ति पत्र के रूप में सम्मान मिलेगा। यह अविस्मरणीय क्षण है।
- सूर्य प्रकाश, वाराणसी
जब मुझे बताया गया कि एप्वाइंटमेंट लेटर राष्ट्रपति देंगे तो मुझे भरोसा नहीं हुआ था पर सोमवार को यह सच हो गया।
- दिव्या कुमारी, वाराणसी
यों तो लाखों लोग कोई न कोई नौकरी पाते हैं पर राष्ट्रपति के हाथों नियुक्ति पत्र मिलना राष्ट्रीय सम्मान से कम नहीं है।
- चंदन कुमार सोनकर, जौनपुर
नौकरी मिलना एक सुखद अहसास है पर राष्ट्रपति के हाथों इसका पत्र मिलना इस पल को बेहद खास बना देता है।
- हिना जाफरी, वाराणसी
खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं कि देश के प्रथम नागरिक से नियुक्ति पत्र के रूप में सम्मान पाने का मौका मिला।
- रोहन सिंह, वाराणसी
राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री सहित गणमान्य लोगों की मौजूदगी में नियुक्ति पत्र मिला। खुशी जताने के लिए शब्द नहीं हैं।
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मशी उल्लाह, चंदौली
देश भर में चुनिंदा लोग ही ऐसे होंगे, जिनको राष्ट्रपति से नियुक्ति पत्र मिलता हो। मैं खुद को बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।
- सीता कुमारी, मिर्जापुर
आज इतने प्रतिष्ठित मंच पर नियुक्ति पत्र मिलने से आत्मविश्वास बढ़ा है। अब जिंदगी में कुछ करने की भी इच्छा मजबूत हुई है।
- बिंदू कुमारी, वाराणसी
मंच पर मिले सम्मान ने जीवन में कुछ कर गुजरने का जज्बा पैदा किया है। यह पल कैरियर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- संदीप तिवारी, वाराणसी
राष्ट्रपति से नियुक्ति पत्र पाकर बेहद खुश हूं। जीवन में ऐसा मौका बहुत कम लोगों को मिलता है। मैं इसे जिंदगी भर नहीं भूलूंगी।
- श्रद्धा पांडेय, भदोही