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इंतजार में बीत गए तेरह दिन, नहीं मिला सका 11 करोड़

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कोरोना की संभावित तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर सरकार की ओर से भले ही जांच, इलाज से जुड़ी तैयारियां समय से पूरी करने का निर्देश दिया जा रहा है, लेकिन आईएमएस बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी लैब में 13 दिन से ठप कोरोना की आरटीपीसीआर जांच अब तक शुरू नहीं हो पाई है। जांच के बाकी 11 करोड़ रुपये कब तक मिलेंगे, इस बारे में कोई निर्णय नहीं हो पाया है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में वाराणसी समेत आसपास के जिलों के सैंपल की जांच माइक्रोबायोलॉजी लैब में हुई। वहीं, शनिवार को छात्रों ने भी कुलपति से मिलकर जांच बंद होने की शिकायत कर जांच शुरू न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी।
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एमआरयू लैब में जारी है जांच
आईएमएस बीएचयू में माइक्रोबायोलॉजी लैब में बजट न मिलने की वजह से जांच बंद है, लेकिन एमआरयू लैब में हर दिन जांच हो रही है। इसमें वाराणसी के साथ ही अन्य जिलों से सैंपल आ रहे हैं। सीएमओ डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि जिले में हर दिन चार से पांच हजार सैंपल लिया जा रहा है, जिसमें दो हजार एंटीजन जबकि 3 हजार आरटीपीसीआर में एक हजार मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा बाकी बीएचयू एमआरयू लैब भेजा जा रहा है। बताया कि माइक्रोबायोलॉजी लैब के बारे में लैब प्रभारी के स्तर से ही बातचीत चल रही है।
जिलों पर बढ़ा जांच का दबाव
माइक्रोबायोलॉजी लैब में वाराणसी के साथ ही गाजीपुर, चंदौली सहित अन्य जिलों से हर दिन पांच से छह हजार सैंपल आते थे। तेरह दिन से जांच ठप होने से जिलों पर सैंपल का दबाव बढ़ गया है। शासन की ओर से हर जिले में एक अस्पताल में आरटीपीसीआर जांच की सुविधा शुरू की गई है, लेकिन जांच की क्षमता कम होने की वजह से सैंपल बीएचयू माइक्रोबायोलॉजी लैब आते थे। अब इन जिलों में दबाव कम नहीं हो पा रहा है।
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