आए दिन रोडवेज कर्मियों और डग्गामार संचालकों के बीच नोकझोंक होती है। नियमानुसार रोडवेज के एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी डग्गामार वाहन को सवारी भरने की अनुमति नहीं है। इन बसों पर उत्तर प्रदेश पं. सं. और उत्तर प्रदेश प. नि. लिखकर संचालित किया जा रहा है। इससे यात्रियों में भ्रम की स्थिति रहती है।
जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने कहा कि अतिक्रमण और डग्गामारी के खिलाफ संयुक्त टीम गठित की गई हैं। लगातार समीक्षा भी की जा रही है। अगर किसी तरह की शिकायत और गड़बड़ी मिली तो टीम पर भी कार्रवाई होगी।
अतिक्रमण ने निगल ली आधी सड़क
कैंट रेलवे स्टेशन के सामने ठेले, खोमचे और डग्गामार वाहनों के अतिक्रमण के कारण आधी सड़क गायब हो गई है। सुबह और शाम को जाम की स्थिति हो जाती है। सड़क के बीच तक ठेले, खोमचे सज जाते हैं और डग्गामार वाहन भी बीच सड़क से सवारी भरते हैं।
वहीं, कैंट स्टेशन के प्रवेश द्वार पर ऑटो चालकों की मनमानी के कारण 30 फीट से अधिक चौड़ा प्रवेश मार्ग सिकुड़ कर तीन से चार फीट का हो गया है। कुछ ऐसा ही नजारा स्टेशन के सामने वाली सड़क का भी है। दूसरी तरफ भी ऑटो, बस और छोटे वाहन सड़क से ही सवारियां उठाते हैं, जिसके कारण जाम की स्थिति बनती है।
केस एक
दोपहर 12.48 बजे जौनपुर, खेतासराय...की आवाज लगाता हुआ बस का कं डक्टर रोडवेज बस स्टैंड के सामने से ही यात्रियों को अपनी बस में बैठने को कह रहा था। यात्रियों ने जब पूछा कि बस कहां हैं तो उसने हाथ के इशारे से सड़क की दूसरी तरफ खड़ी बस में बैठने का संकेत दिया। इसके बाद यात्रियों का जत्था बस की ओर रवाना हो गया।
केस दो
दोपहर 1.05 बजे इलाहाबाद जाने वाली कुछ डग्गामार बसें रोडवेज बस स्टैंड के प्रमुख द्वार से महज 10 मीटर की दूरी पर खड़ा करके सवारियों को भरा जा रहा था। मौके पर तैनात ट्रैफिक व पुलिस के सिपाही भी मूकदर्शक बने थे।