दुनिया को समाज सुधार का पाठ पढ़ाने वाले संत कबीर की जयंती पर सोमवार को मूलगादी परिसर में अनुयाइयों का रेला उमड़ पड़ा। हजारों की तादाद में कबीरपंथियों ने मूलगादी परिसर में संत कबीर की प्रतिमा के दर्शन किए। यहां कबीर झोपड़ी के प्रस्तावित मॉडल को भी भक्तों ने निहारा।
भक्तों की टोली कबीर के दोहे और पद गाने में जुटी रही। दोपहर बाद हुई परिचर्चा में मूलगादी के आचार्य महंत विवेकदास ने कहा कि इस दौर में कबीर के विचारों पर चलकर ही हम देश और समाज का भला कर सकते हैं। कबीर चौरा स्थित मूलगादी परिसर में हजारों अनुयाइयों ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
इस मौके पर नीरू टीले के अलावा कमाली की प्रतिमा और संत कबीर की शिष्य मंडली की प्रतिमाओं के दर्शन के लिए भीड़ लगी रही। तमाम कबीरपंथी सुबह ही झोल, झांझ के साथ कबीर के दोहों और पदों को गाने लगे थे। कबीर के मंदिर में दर्शन और सद्गुरु के चरणों में हाजिरी लगाने के लिए भी हरियाणा, पंजाब, गुजरात, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश समेत देश के कोने-कोने से भक्त पहुंचे थे। देर शाम तक मूलगादी परिसर में कबीरपंथियों का जमावड़ा लगा रहा।
उमरहां में उमड़े कबीर के अनुयायी
स्वरर्वेद मंदिर, उमरहां में कबीर के अनुयायियों का जमावड़ा लगा हुआ है। पूरा परिक्षेत्र बीजक पाठ और कबीर की वाणी से गूंज रहा है। कबीर प्राकट्य और विहंगम योग महोत्सवके दूसरे दिन सोमवार को देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने योगासन, प्राणायाम और कथाश्रवण के बाद महायज्ञ में आहुतियां दीं। विहंगम योग के संत विज्ञान देव महारान ने कहा कि कबीर ने समाज को मानवता के सूत्र में बांधने का काम किया है।
वह सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के पक्षधर थे। उनके विचारों को आज पूरी दुनिया आत्मसात कर रही है। स्वतंत्र देव महाराज ने कहा कि कबीर को केवल समाज सुधारक समझना ठीक नहीं हैं। वह हठयोगी और अद्वैतवादी संत भी थे। इसके बाद देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही अमेरिका और जर्मनी समेत कई देशों से आए अनुयायियों ने महायज्ञ में आहुतियां दीं।