युवा पीढ़ी में मातृभाषा खासकर हिंदी की अहमियत बढ़ाने के लिए मोदी सरकार शिक्षा नीति में बदलाव की तैयारी कर रही है लेकिन प्रधानमंत्री के गोद लिए गांव जयापुर में हिंदी की दुर्दशा हो रही है। अब तक आपने ‘गऊशाला’ और ‘गोशाला’ सुना होगा मगर जयापुर में ‘काऊशाला’ बनाई जा रही है। इसका शिलान्यास केंद्र सरकार को दो मंत्रियों ने किया था। शिलापट्ट पर ‘आदर्श भारतीय काऊशाला जयापुर’ लिखा देख कर इस ‘हिंग्लिश’ पर सबके मन में सवाल जरूर उठता है? इसे लगवाने की संस्था का कहना है कि गोशाला की अपेक्षा बड़ी योजना होने के कारण इसका नाम ‘काऊशाला’ रखा गया।
पीएम के गोद लिए गांव में काऊशाला का शिलान्यास बीते 13 जुलाई को मोदी सरकार के दो मंत्रियों केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण, उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने किया था। उसी दिन से इस शिलापट्ट पर लिखा ‘काऊशाला’ शब्द गांव के हरेक शख्स को चौंका रहा है। गांव की प्रधान दुर्गावती देवी ने बताया कि काऊशाला असल में गोशाला ही है। इस गौशाला में 100 गायों को रखने की व्यवस्था है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की संस्था अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन के सहयोग भारतीय माइक्रो क्रेडिट ने इस काऊशाला की स्थापना गांव में की गई है। भारतीय माइक्रो क्रेडिट के विजय पांडेय का कहना है कि गोशाला से केवल गाय पालने की जगह का बोध होता है लेकिन ‘काऊशाला’ के पीछे इससे ज्यादा बड़ी योजना है। इसमें हम गोपालन के अलावा गो संवर्धन से जुड़ी 34 प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल करने जा रहे हैं। इसमें पशुपालन, पशु आहार, कंपोस्ट बनाने, दुग्ध संरक्षण आदि की व्यवस्था की जाएगी। लिहाजा हमने इसका नाम गोशाला के बजाय काऊशाला रखा।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि नारायण पटेल ने बताया कि जब काऊशाला शब्द का जिक्र आया तो मेरे जेहन में सवाल उठा था। मैंने जब संस्था के लोगों इस बाबत पूछा तो उनका कहना था कि अमेरिका और इंडिया दोनों देशों के लोग इस फाउंडेशन के सदस्य हैं। हिंग्लिश नाम रखा गया है। इसके पीछे दूसरी कोई और वजह नहीं है और न ही हिंदी को दोयम दिखाने की ही कोई मंशा है। पटेल ने बताया कि 25 सितंबर को कृषि मंत्री राधामोहन सिंह जयापुर का दौरा कर सकते हैं। वे काऊशाला भी जाएंगे। उसी दिन से यह गोशाला काम करने लगेगी।