वाराणसी। राजघाट में 68 वर्ष पहले मिले कंकाल के दांतों के नमूनों की वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी गई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे करीब 3000 वर्ष पहले काशीवासियों के खानपान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। साथ ही यह भी पता चल सकेगा कि संबंधित व्यक्ति का आहार मुख्य रूप से शाकाहारी था या मांसाहारी।
वैज्ञानिक दांतों में ऑक्सीजन और कार्बन के स्थिर आइसोटोप का विश्लेषण करेंगे। इसके लिए दांतों के एनैमल और हड्डियों से कार्बन तथा ऑक्सीजन आइसोटोप का परीक्षण किया जाएगा। इससे काशी के प्राचीन निवासियों के आहार, जीवनशैली और उस समय के पर्यावरण के बारे में वैज्ञानिक प्रमाण मिल सकेंगे। दांतों की जांच से गेहूं, बाजरा जैसे अनाजों के उपयोग तथा दुग्ध उत्पादों के सेवन की भी जानकारी मिलने की संभावना है। वहीं, ऑक्सीजन आइसोटोप के अध्ययन से स्थानीय जल स्रोतों और संभावित भौगोलिक आवागमन (प्रवास) के संकेत भी मिलेंगे।
दूसरी ओर, रेडियोकार्बन डेटिंग के जरिए कंकाल की प्राचीनता का निर्धारण किया जाएगा। साथ ही मृत्यु के समय उसकी आयु, स्वास्थ्य स्थिति, संभावित रोगों के चिह्न और शारीरिक विशेषताओं का भी विश्लेषण किया जाएगा। यह शोध बीएचयू के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग तथा जंतु विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा किया जा रहा है।
इसके अलावा अमेलोजेनिन जीन के विश्लेषण से यह पुष्टि की जाएगी कि कंकाल पुरुष का है या महिला का। हालांकि प्रारंभिक जांच में यह पुरुष का कंकाल प्रतीत होता है, लेकिन इसकी वैज्ञानिक पुष्टि की जाएगी। यदि कंकाल पुरुष का पाया जाता है, तो वाई-क्रोमोसोम हैप्लोग्रुप और संबंधित आनुवंशिक मार्करों का अध्ययन भी किया जाएगा। इससे पैतृक वंशावली, आनुवंशिक संबंधों और प्राचीन पुरुष आबादी की संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। साथ ही इसकी तुलना राखीगढ़ी से प्राप्त आनुवंशिक विश्लेषण के निष्कर्षों से भी की जाएगी।