प्रदेश में जनाधार बढ़ाने के लिए भाजपा अब आंदोलन की राह चलेगी। भाजपा की रणनीति का खुलासा शनिवार को प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र से शनिवार को प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का एलान किया।
उन्होंने बताया कि चरणबद्ध आंदोलन का आगाज 25 नवंबर से होगा। आंदोलन का पहला चरण कानून व्यवस्था और किसानों को समर्पित होगा जबकि दूसरे चरण में प्रदेश के विकास को भाजपा मुद्दा बनाएगी।
वाजपेयी ने पंचवटी लान में आयोजित काशी क्षेत्र की बैठक में बताया कि काशी क्षेत्र के आंदोलन का केंद्र बनारस होगा जबकि ब्रज का आंदोलन अलीगढ़ से संचालित होगा। इसी तरह कानपुर का कन्नौज और गोरखपुर क्षेत्र का आंदोलन आजमगढ़ से शुरू होगा।
बनारस और अलीगढ़ में आंदोलन 26 नवंबर से तथा कानपुर और गोरखपुर क्षेत्र में आंदोलन 25 नवंबर से शुरू होगा। बताया कि सप्ताहव्यापी आंदोलन के तहत क्षेत्र के हर जिले में एक-एक दिन धरना-प्रदर्शन होगा। आंदोलन का नेतृत्व पार्टी के सांसद और विधायक करेंगे।
हालांकि संसद का शीत सत्र भी शुरू होने वाला है, लिहाजा सांसदों को रियायत भी दी गई है। साथ ही, कहा गया है कि संसद में उपस्थिति जरूरी न हो तो आंदोलन में शरीक हों। वाजपेयी ने कहा कि पिछले पांच साल में केंद्र से विकास मद में मिली धनराशि की जानकारी हासिल कर ली गई है।
ऐसे में दूसरा चरण ‘पोल खोल’ होगा। प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष के इस्तेमाल की गाइड लाइन जारी करने की भी मांग की और कहा जिस तरह से दादरी में अखलाक और जियाउल हक मामले में वोट बैंक की खातिर विवेकाधीन कोष का इस्तेमाल किया गया, वह सरासर गलत है।
उन्होंने धर्म के आधार पर मुआवजा वितरण को गलत बताया। वाजपेयी ने जिलों के सूखाग्रस्त घोषित करने में राज्य सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया और कहा कि केवल 45 जिले ही क्यों, 76 क्यों नहीं? क्या बारिश चेहरा देख कर हुई है? हाल यह है कि पूरा प्रदेश सूखे की चपेट में है। वाजपेयी ने किसानों को ओलावृष्टि मुआवजा वितरण में भी धांधली का आरोप लगाया।