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Varanasi News: धर्म निरपेक्षता का छद्म स्वरूप और जातिवाद समाज की सबसे बड़ी समस्या

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राजकीय पुस्तकालय में नव संस्कृतिक साहित्य संघ विद्याश्री न्यास साहित्यिक संघ एवं जिला पुस्तकालय
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नरेंद्रदेव जयप्रकाश और लोहिया ने समाजवाद और जनतंत्र को राष्ट्रीयता से निकला हुआ बताया था। वे इसे भारत की राष्ट्र शक्ति मानते थे। इसके बिना राष्ट्र अशक्त और निरर्थक हो जाता है। आज की सबसे बड़ी सामाजिक समस्या धर्म निरपेक्षता का छद्म स्वरूप और जातिवाद है। यह बातें बुधवार को भाजपा एमएलसी धमेंद्र सिंह ने प्रो. इंदीवर की पुस्तक समाजवाद- प्रयोग और पतन के लोकार्पण और पुस्तक विमर्श पर कहीं।
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उन्होंने बताया कि यह आयोजन प्रो. उर्मिला मिश्र शब्द संवाद के 15वें आयोजन पर किया गया। कहा कि लोहिया के बाद समाजवादी लोगों में जाति और छद्म धर्मनिरपेक्षता दोनों बुराइयां बढ़ी हैं। इसे राष्ट्र चेतना ही रोक सकती है। लोहिया ने अकेले सैद्धांतिक कर्म को चरितार्थ किया था। उनके निधन के बाद समाजवादियों की सिद्धांतहीन गठजोड़ वाली सत्ताभूख ने उसे बिखरा के पतनशील बना दिया। अध्यक्षता करते हुए प्रो. दीपक मलिक ने कहा समाजवाद रोटी का आंदोलन नहीं, एक सांस्कृतिक आंदोलन है। प्रो. सुरेंद्र प्रताप ने कहा समाजवाद में नैतिक अंश की प्रधानता है। प्रदीप कुमार ने लेखक को बधाई देते हुए कहा - पुस्तक में समाजवाद का इतिहास है। इसमें तीनों संस्थापक नेताओं के सिद्धांतों और विचारों का सम्यक विश्लेषण हुआ है। डा. प्रज्ञा सिंह ने विचार रखे। संचालन प्रो. श्रद्धानंद, स्वागत दयानिधि मिश्र, धन्यवाद ज्ञापन नरेंद्र नाथ मिश्र ने किया। कुंवर सुरेश सिंह, लाल साहब सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए। दूसरे सत्र में भव्य कवि गोष्ठी हुई। इसमें प्रो. वंदना मिश्र, प्रो. इशरत जहां, डाॅ. मुक्ता, डा. अक्षय पांडेय, संतोष प्रीत, बुद्धदेव तिवारी समेत कई ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता डाॅ. चंद्रभाल सुकुमार संचालन प्रसन्नवदन चतुर्वेदी अनध व धन्यवाद ज्ञापन संतोष कुमार ने की।
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