डीरेका में कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार करते नरेंद्र मोदी।
नोटबंदी के फैसले के बाद भाजपा में उपजी हताशा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र के पांच विधानसभा की बूथ स्तरीय कमेटियों के कार्यकर्ताओं में उत्साह पैदा करने का मंत्र दिया। कार्यकर्ताओं को जनता से जुड़ने उनकी जरूरतें समझने की सीख दी। पार्टी की रीति नीति के बारे में इस प्रकार से बताया जैसे कोई शिक्षक अपनी कक्षा में बच्चों को पढ़ाता है। उन्होंने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य, नोटबंदी और सर्जिकल स्ट्राइक का फीडबैक भी लिया।
यूपी में सिर पर खड़े विधानसभा चुनाव को देखते हुए पीएम की ग्रास रूट लेबल के कार्यकर्ताओं के साथ मंत्रणा को बेहद अहम माना जा रहा है। पीएम ने जहां खेत-खलिहान, गांव-किसान, व्यापार-उद्योग के साथ समाज के अन्य वर्गों के बीच पहुंचकर जानकारी लेने और उनकी स्थितियों का अध्ययन करने की सलाह दी, वहीं जनता के बीच भाषा-व्यवहार पर नियंत्रण रखने की हिदायत भी दी। डीरेका में कार्यकर्ताओं के बीच पीएम का संवाद 2.25 घंटे चला।
डीरेका में ग्रास रूट लेबल कार्यकर्ताओं के बीच बैठकर पीएम ने अपने टिफिन का खाना खाया और चुनावी रणनीति पर मंत्रणा की। उन्होंने भाजपा के बूथ कमेटियों के कार्यकर्ताओं को समझाया कि राजनीति करते हुए आमजन के बीच पैठ कैसे बनाई जाए। अपने विचारों और तर्कों से दूसरों को कैसे प्रभावित किया जाए। पीएम मोदी ने अपनों के बीच सुनने, गुनने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव में कामयाबी का मंत्र बहुत बारीकी से दिया। कहा कि हम कार्यकर्ताओं को खेत-खलिहान, गांव-किसान, व्यापार-कारोबार सहित समाज के सभी वर्गों और उनके पहलुओं के बारे में जानकारी रखना चाहिए। अपने विचार अच्छे ढंग से रखने का अभ्यास करना चाहिए और संवाद की कोशिश करना चाहिए। बीजेपी में इसीलिए अभ्यास और प्रशिक्षण की परंपरा है। हमें समाज के गरीब, वंचित और शोषित वर्ग को आश्वस्त करना होगा कि हम उनके हक के लिए समर्पण और संघर्ष करना जानते हैं।
कार्यकर्ताओं से संवाद में भ्रष्टाचार और काले धन के खात्मे का अपना संकल्प दोहराते हुए दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार और काला धन मिटाकर रहूंगा। कार्यकर्ताओं में उत्साह भरते हुए पीएम ने कहा कि विपक्षी सोच रहे थे नोटबंदी का फैसला करके मोदी फंस गया है। राजनीति खत्म हो जाएगी। सरकार का सूपड़ा साफ हो जाएगा लेकिन विपक्षी चिल्लाते रह गए और जनता ने उनका नहीं, सरकार का साथ दिया। कहा, आठ नवंबर को नोटबंदी के फैसले पर भड़काने के बाद भी देश के बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ सरकार को विचलित नहीं कर पाए। 50 दिन बाद स्थिति ठीक होनी शुरू होगी।