रवींद्रपुरी स्थित अघोराचार्य बाबा कीनाराम की तपस्थली क्रीं कुंड पर लोग बिगड़ी बनाने आते हैं। मान्यता है कि यहां अरजी लगाने से मनोकामना पूरी होती है। जिस क्रीं कुंड में कभी बाबा डुबकी लगाते थे, उसके औषधीय जल के श्रद्धालु कायल हैं। लोग इसमें स्नान कर रोग-दुख दूर करते हैं। नि:संतानों को संतान की प्राप्ति होती है, शारीरिक विकार दूर हो जाते हैं लेकिन अब इस कुंड का जल हरा हो गया है। 24 मीटर गहरे कुंड की 12 साल से सफाई नहीं हुई है।
रविवार और मंगलवार को तो इस कुंड में डुबकी लगाने के लिए रेला उमड़ता है। आषाढ़ में गुरु पूर्णिमा पर इस कुंड के तट पर मेला लगता है। लोग इसी जल के आचमन से खुद को पवित्र करने के साथ ही बाबा सिद्धार्थ गौतम राम का आशीर्वाद लेते हैं। लोलार्क षष्ठी पर तो संतान की प्राप्ति के लिए देश के कोने-कोने से दंपतियों की भीड़ इस कुंड पर लगती है।
कुंड के रखरखाव के प्रति नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है। 12 वर्ष पहले अघोराचार्यपीठ की ओर से ही इस कुंड की सफाई कराई गई थी, तब चार पंप लगाकर पानी एक तरफ निकाला जा रहा था, दूसरी ओर कुंड निर्मल जल से भरता जा रहा था। अब लोग इस जल से कष्ट दूर करने के साथ ही मछलियों को चारा खिलाकर पुण्य बटोरते हैं।