मणिकर्णिका के महाश्मशान पर सोमवार की रात तीन सौ साल पुरानी रुढ़ियों को ठुमरी गायिका पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने सुर-लय की साधना से तोड़ दिया। श्मशान महोत्सव की निशा अब तक जहां नगर वधुओं के नृत्य से सजती रही, वहीं इस बार सोमा के कंठ से ठुमरी, दादरा और चैती के सुहाने बोल फूटे। एक तरफ चिताएं जलती रहीं, दूसरी ओर नगर वधुओं के घुंघरूओं की झंकार गूंजती रही।
रात करीब दस बजे जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र, सीडीओ पुलकित खरे की मौजूदगी में फूलों की सुसज्जित बाबा मशाननाथ के महोत्सव की बेला सोमा घोष की बंदिशों से सुरमयी हो उठी। उन्होंने शुरुआत की चैती से। चईत मासे बोलेले कोइलिया हो रामा अमवा की डरिया...। इसके बाद बनारसी ठुमरी, दादरा और फिर मशान की होरी गाकर उन्होंने महफिल में चार चांद लगाए। खेले मशाने में होली दिगंबर.. बोल पर भी लोगों को झूमने-थिरकने के लिए मजबूर कर दिया।
इसके बाद रात करीब 11 बजे बमबम बोल रहा है काशी और सत्यम शिवम सुंदरम के बोल के साथ देशभर से आई नगर वधुओं का नृत्य शुरू हो गया।
सपना देवी, सोनम, साक्षी, गीता, रागिनी और दिव्या ने फिल्मी और भोजपुरी गीतों पर आधी रात के बाद तक धमाल मचाया। नृत्य देखने के लिए उमड़ी भीड़ से आधी रात मणिकर्णिका घाट जाने वाली गलियों में जाम लगा रहा।
महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर यह कार्यक्रम बाबा मशाननाथ संघर्ष समिति की ओर से आयोजित किया गया था। अध्यक्ष चयनू प्रसाद गुप्ता, महामंत्री बिहारी लाल गुप्ता और व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने आभार जताया।