पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद होने से बनारसी साड़ी उद्योग को तगड़ा झटका लगा है। करोड़ों की साड़ियां कारखानों और गद्दियों पर डंप पड़ी हैं। पुराने ऑर्डर भी कैंसिल कर दिए गए हैं। लगभग ढाई लाख पावरलूम और हथकरघों की आवाज लगभग बंद हो चुकी है। सुबह-शाम गुलजार रहने वाली साड़ी मंडी में इन दिनों थके-हारे उदास चेहरे ही दिख रहे हैं। कारोबार ठप होने से छह से आठ लाख बुनकरों के सामने रोजी-रोटी का संकट हो गया है।
पिछले एक सप्ताह से जिले में बनारसी साड़ी उद्योग के बड़े केंद्र लोहता क्षेत्र में 10 हजार से अधिक बुनकरों के घरों के चूल्हे बड़ी मुश्किल से जल रहे हैं। जानकारों के अनुसार एक सप्ताह पहले तक बनारसी साड़ियों का रोजाना लगभग 20 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, आज गद्दीदारों को थोक और फुटकर खरीदार नहीं मिल रहे। पावरलूम संचालकों के पास करोड़ों के ऑर्डर की साड़ियां डंप पड़ी हैं।
नोटबंदी के बाद जब पावरलूम मालिकों ने ऑर्डर देने वाले व्यापारियों से माल ले जाने को कहा तो लगभग सभी ने यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि अभी पैसा नहीं है, माल नहीं उठा सकते। यही नहीं, धंधा चलाने के लिए बुनकरों और पावरलूम संचालकों को उनका बकाया भी नहीं मिल रहा है।