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Varanasi News: भारतीय ग्राम जीवन का जीवंत दस्तावेज हैं डॉ. राजेंद्र प्रसाद पांडेय के साहित्य

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रथयात्रा पर कन्हैया लाल स्मृति भवन में हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते सदानंद शाही । अमर
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डॉ. राजेंद्र पांडेय ने विद्यानिवास मिश्र की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ललित निबंध को नई ऊंचाइयां दी हैं। उनके साहित्य भारतीय ग्राम जीवन के जीवंत दस्तावेज हैं। यह बातें शुक्रवार को प्रो. सुमन जैन ने नांदी सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पंचम राष्ट्रीय संगोष्ठी डॉ. राजेंद्र प्रसाद पांडेय स्मृति समारोह के समापन अवसर पर कहीं।
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डॉ. राहुल ने कहा कि उनकी रचनाओं में कृत्रिमता नहीं, बल्कि अनुभवजन्य सत्य और स्वाभाविकता का प्रभावी चित्रण मिलता है। वीणा के संपादक राकेश शर्मा ने कहा कि डॉ. पांडेय का साहित्य अपने समय के प्रश्नों को उठाने के साथ उनके समाधान की दिशा भी प्रस्तुत करता है। डॉ. प्रकाश उदय ने कहा कि यह साहित्यिक व्यक्तित्वों का आत्मीय दस्तावेज है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. रामसुधार सिंह ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद पांडेय मूलतः कवि थे, लेकिन बाद में कथाकार, निबंधकार, समालोचक और चिंतक के रूप में स्थापित हुए।
अगले सत्र में 75 के बलराम का सम्मान में प्रो. शिवनारायण ने बलराम के वैयक्तिक जीवन, संपादन और उनकी चर्चित कहानी कलम हुए हाथ से जुड़े संस्मरण साझा किए। राकेश शर्मा ने उन्हें कुशल संपादक और सच्चा मित्र बताया। विजय शर्मा ने बलराम से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाए। विनय दास ने कहा कि बलराम ने संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद विशिष्ट लेखन किया। फारूक अफरीदी ने कहा कि उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। नरेंद्र पुंडरीक ने उनकी सक्रियता और स्वतंत्र व्यक्तित्व को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता सदानंद शाही ने कहा कि बलराम की कहानियों में ग्रामीण संवेदना और समय बोध स्पष्ट दिखाई देता है। माधव कौशिक ने कहा कि प्रकृति ने बलराम को लेखन के लिए चुना है, इसलिए वे अपने लेखन के साथ कभी अन्याय नहीं करते। अध्यक्षता जयप्रकाश पांडेय ने की। संचालन डॉ. संगीता श्रीवास्तव व धन्यवाद ज्ञापन ज्ञानेंद्र राय ने किया।
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समापन सत्र में माधव कौशिक, जयप्रकाश पांडेय, प्रो. अनंत मिश्र, डॉ. शशिकला पांडेय, कीर्ति रत्न एवं यशोरत्न पांडेय ने प्रो. शिवनारायण (हिंदी) तथा डॉ. गायत्री प्रसाद पांडेय (संस्कृत) को डॉ. राजेंद्र प्रसाद पांडेय सृजन शिखर सम्मान और एक-एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की। वहीं, डॉ. राहुल को उनकी पुस्तक संवेदना और यथार्थ के सर्जक, सुरेंद्र वाजपेयी को खेत में महल (गीत संग्रह), लालित्य ललित को निराली दुनिया (व्यंग्य संग्रह), डॉ. राजेंद्र कनौजिया को प्रेम न हाट बिकाय (कहानी संग्रह) और शुभंकर बाबू को वेद वेदांग विमर्श के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद पांडेय सृजन शिखर पुरस्कार दिया गया।
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