जय गुरुदेव के अनुयायी पंकज बाबा
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राजघाट भगदड़ प्रकरण की जांच न्यायिक जांच आयोग ने बुधवार से शुरू कर दी। आयोग के अध्यक्ष आरएम चौहान और सचिव ज्ञान चंद्रा बुधवार शाम करीब चार बजे सर्किट पहुंचे। देर शाम कमिश्नर और आईजी समेत पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की।
गुरुवार की सुबह आयोजन और भगदड़ से जुड़े रिकार्ड लेकर सभी अधिकारियों को बुलाया गया है। सभी अधिकारी अपना पक्ष करेंगे। इसके बाद नोटिफिकेशन जारी होगा। इस महीने के अंत में बयान दर्ज किए जाएंगे।
जय गुरुदेव के उत्तराधिकारी पंकज बाबा की शोभायात्रा में गत 15 अक्तूबर को राजघाट पुल पर मची भगदड़ में 25 लोगों की मौत हो गई थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तत्कालीन एसएसपी और डीएम का तबादला करने के साथ ही सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।
हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश आरएम चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित की थी। ज्ञान चंद्रा सचिव बनाए गए। हादसे के करीब दो माह बाद आयोग ने जांच शुरू की है। मौसम खराब होने से आयोग के अध्यक्ष और सचिव दोपहर एक बजे के बजाए शाम चार बजे पहुंचे। टीम गुुरुवार की शाम वापस लौट जाएगी।
इस महीने के अंत में टीम के दोबारा आने आने की उम्मीद है। बता दें कि भदगड़ को लेकर पुलिस और प्रशासन में जमकर खींचतान हुई थी। एलआईयू का दावा था कि उसने पूर्व में ही ज्यादा भीड़ की संभावना जताते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी थी लेकिन ध्यान नहीं दिया गया।
वहीं पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अपने बचाव में कहते रहे कि पंकज बाबा ने शोभायात्रा में पांच हजार लोगों के शामिल होने की सूचना दी थी लेकिन यात्रा में तीन लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। अफसरों ने कहा था कि राजघाट पुल पर भीड़ के दौरान ही किसी ने पुल हिलने की अफवाह उड़ा दी, जिससे भगदड़ मची।